शहर में बरसात और बिजली से हाहाकार

Bareilly Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। शहर में हो रही बरसात ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह चौपट कर दिया। तेज हवा से हाईटेंशन लाइन पर पेड़ टूटकर गिर पड़े। हाईटेंशन लाइनों के ब्रेक डाउन होने से सोमवार की रात 12 बजे के बाद शहर की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। मंगलवार को 18 घंटे बाद शाम छह बजे तक शहर के कुछ हिस्सों की ही बिजली सुचारू हो पाई। शहर के आधे से ज्यादा इलाकों में अंधेरा छाया रहा।
सोमवार की रात को बरसात के बीच रात करीब बारह बजे तेज हवा चलने लगी। इससे 132 केवी दोहना बिजली घर से 66 केवी सिविल लाइंस बिजलीघर को आने वाली हाईटेंशन लाइन पर पेड़ टूटकर गिर पड़े । इससे दो पोल टूट गए और तार नीचे आ गिरे। 66 केवी बिजलीघर को आपूर्ति न मिलने से रात 12.10 बजे के किला, चौपुला, राजेंद्रनगर, कमल टाकीज, पुराना शहर, बारादरी, शाहदाना आदि सब स्टेशनों के इलाके में अंधेरा छा गया। इसके बाद 1.10 बजे दोहना बिजलीघर से आरवीआरआई, बेसु, दोहरा टांडा, अटा मांडा और नवाबगंज की लाइनें भी फाल्ट होने से बंद कर दी गईं। बेसु फीडर की लाइन पर नार्थ सिटी बाईपास के पास पेड़ गिरने से चार पोल टूटकर गिरने पर वहां की आपूर्ति सुचारु कराने के लिए बिजली अफसरों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
बिजली विभाग के अधिकारी आधे से ज्यादा शहर की बिजली आपूर्ति सुचारु कराने में बेबस नजर आए। लेकिन इसी बीच 220 केवी सीबीगंज ट्रांसमिशन बिजलीघर के ट्रांसफार्मर का जंपर जल गया। इससे परसाखेडा और इंस्डस्ट्रीयल फीडर भी बंद हो गए। पूरे शहर की बिजली गुल होने से शहर की सड़कों पर अंधेरा छाया रहा। बरसात में बिजली न मिलने पर लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ी। बच्चों को स्कूल जाने काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर की आपूर्ति ठप होने पर अधीक्षण अभियंता ( शहर) ने अधिशासी अभियंताओं को अपने -अपने इलाकों की लाइनों की पेट्रोलिंग कराने के निर्देश दिए। साथ ही वह खुद मंगलवार को 9.30 बजे सिविल लाइंस बिजलीघर पर आकर बैठ गए। टीमें पहले से ही फाल्ट तलाशनें में जुटी थीं। कैंट में दोनों पेड़ों को हटाकर हाईटेंशन लाइन को दूसरे पोल से जोड़कर किला सब स्टेशन की सप्लाई 2.20 पर चालू की गई। लेकिन फिर ओसीबी ट्रिप कर गई। बाद में लाइन को फिर से दिखवाया गया। हाईटेंशन लाइन भी बार-बार ट्रिप कर रही थी, बिजली अधिकारी ने नटराज टाकीज के पास हाईटेंशन लाइन को ट्रिप कर रही पेड़ की टहनी को कटवा दिया। इस तरह से शाम छह बजे भी शहर के कई इलाकों की सप्लाई चालू नहीं हो पाई थी। अधीक्षण अभियंता शहर वर्मा ने बताया कि शाम 5.30 बजे के बाद शहर के ज्यादातर इलाके की आपूर्ति सुचारु कर दी गई है। इज्जतनगर इलाके की सप्लाई सामान्य होने में काफी समय लगा। वहां बेसु फीडर को आने वाली लाइन पर पेड़ गिरने से चार पोल गिर गए थे।
पेड़ों की टहनी बनी मुसीबत
बरेली। शहर को बिजली आपूर्ति देने वाली मैन लाइन कैंट से होकर गुजरती है। 132 केवी दोहना से आने वाली इस लाइन के आसपास पेड़ों का जाल है। जरा सी हवा चलने पर ही लाइन ट्रिप कर जाती है। इसी से शहर की आपूर्ति बंद हो जाती है। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि टहनी को कटवाकर लाइन का मेंन्टीनेंस कराया जाएगा। जहां तार कमजोर हैं, उन्हें बदलवाया जाएगा।
लोकल फाल्ट तलाशती रहीं टीमें
बरेली। बरसात के दौरान सब स्टेशनों से कोई टीम लाइनों को ठीक करने के लिए नहीं निकली। बरसात जैसे ही दोपहर 2 बजे हल्की हुई शहर के सभी सब स्टेशनों से टीमें लाइनों को ठीक करने के लिए जुट गईं। 16 टीमें लोकल फाल्ट तलाशने के लिए निकलीं। शाम तक टीमों ने लाइनों को ठीक कर लिया। लेकिन बाद में दोहना से ही सप्लाई नहीं मिल पाई।
बारिश में पेड़ गिरने से रोड जाम
पीलीभीत बाईपास रोड पर पेड़ गिरने से सनसिटी कॉलोनी का रोड घंटों जाम रहा। आसपास रहने वाले लोगों ने पेड़ काटने के बाद रास्ता साफ कराया। सोमवार की रात तेज हवा के साथ बारिश हुई। रात में करीब तीन बजे पीलीभीत बाईपास रोड पर यूके लिप्टस का पेड़ गिर गया। इससे सनसिटी कॉलोनी को जाने वाला रोड जाम हो गया। मंगलवार की सुबह का उधर से गुजरने वाले स्कूली वाहनों व अन्य गाड़ियों को पीछे लौटना पड़ा। रास्ता बंद होने से कई बच्चों का स्कूल छूट गया। पता लगने पर पहुंचे पार्षद अजय सक्सेना ने परतापुर वासियों की मदद से पेड़ कटवाकर रोड खाली कराया।
पशुशाला ढहने से पिता-पुत्र जख्मी
बारिश में अचानक पशुशाला ढहने से पिता-पुत्र जख्मी हो गए। मंगलवार की दोपहर रिमझिम बरसा हो रही थी। उसी दौरान थाना देवरनियां क्षेत्र के करनपुर गांव निवासी अनोखे लाल की पशुशाला की खपरैल और दीवारें ढह गईं। उसमें मौजूद अनोखे और उनका बेटा सत्येंद्र कुमार नीचे दब गए। चीख पुकार सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने मलबा हटाकर पिता-पुत्र को बाहर निकला। ईंटों के नीचे दबने से पशुओं को भी छोटे आईं।
नदियों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ा
भारी बारिश के बीच जिले में नदियों का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन अभी यह खतरे के निशान से दूर है। रामगंगा का जलस्तर 159.660 मीटर हैं। जबकि वह खतरे के निशान से चार मीटर नीचे बह रही है। धौरा जलाशय खतरे के निशान से तीन मीटर कमी पर 213.3 मीटर पर बह रहा है, जबकि खतरे का निशान 216.40 मीटर पर है। बहगुल जलाशय खतरे के निशान को छू रहा है। जलस्तर 208.175 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 208.33 है। नानक सागर जलाशय का जलस्तर खतरे के निशान 212.09 तक पहुं चुका है।
चौबीस घंटे बाद मौसम होगा साफ
जनपद समेत पश्चिमी यूपी में आसमान में छाई घनघोर घटाएं अगले 24 घंटे में साफ हो सकेंगी। फिलहाल यहां पूर्वी यूपी से खिसक कर पहुंची हवाओं की चक्रवाती गतिविधि ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। अगले 24 घंटे में क्षेत्र के कई स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली के पास भी लो प्रेशर एरिया बन रहा है और उसका असर यहां पहुंचने पर बारिश का क्रम तेज हो सकता है।
बरेली मौसम कार्यालय में दर्ज रिकार्ड के अनुसार, मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 90.8 मिमी बारिश हुई। इसके बाद शाम तक चार मिमी बारिश रिकार्ड हुई। मौसम विभाग के अनुसार, पड़ोस के शाहजहांपुर में बीते 24 घंटे में 16 सेमी और बदायूं में सात सेमी बारिश हुई है। सैटेलाइट से मिले चित्रों का विश्लेषण करते हुए बीएचयू के भू भौतिकी विभाग के मौसम विशेषज्ञ प्रो. एसएन पांडेय और डा. राजीव भाटला ने बताया कि बरेली समेत पश्चिमी यूपी में सतह से 2.1 किमी की ऊंचाई तक हवाओं की चक्रवाती गतिविधि बनी हुई है। साथ ही मानसून द्रोणिका (बारिश की कारक परस्पर विरोधी दिशा की हवाओं का समानांतर सीध में रहने की मौसमी गतिविधि) भी दिल्ली से वाराणसी होते हुए गुजर रही है। इसके असर से क्षेत्र में लगातार बादलों की आमद बनी हुई है और बारिश का क्रम बना हुआ है। अगले 24 घंटे में यह मौसमी हलचल क्षेत्र में कुछ शांत पड़ने के आसार हैं। उसके बाद से ही लोगों को थोड़ी राहत मिल पाएगी। बता दें कि बरेली में रविवार रात से झमाझम बारिश हो रही है। इससे मौसम का मिजाज बदल गया है। उसके बाद से बारिश का क्रम मंगलवार दोपहर तक बना रहा।

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