ज्यादा अपने लगते हैं राधेश्याम के राम

Bareilly Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
राधेश्याम रामायण और रामलीला पर शोध के लिए यूएस गवर्नमेंट ने दी स्कॉलरशिप
- शोध के लिए बरेली में रहेंगी डा. पामेला
- बरेली कॉलेज को बनाया है स्टडी सेंटर

बरेली। राधेश्याम रामायण और रामलीला पर शोध करने के लिए अमेरिका की एक प्रोफेसर को फुलब्राइट स्कॉलरशिप मिली है। अमेरिकी एजुकेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत यह स्कालरशिप पाने वाली डा. पामेला जे. लाथ स्मिथ ने अपना शोध शुरू भी कर दिया है। उनका स्टडी सेंटर बरेली कालेज है। वर्षों से भारतीय कला-संस्कृति पर अध्ययन कर रहीं डा. पामेला का राधेश्याम रामायण को लेकर खास नजरिया है। राधेश्याम रामायण के राम ज्यादा अपने से लगते हैं।
पामेला नार्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के एशियन स्टडी सेंटर में साहित्य और भाषा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वह कई सालों से भारतीय संस्कृति, कला और चिंतन पर अध्ययन कर रही हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा, राधेश्याम रामायण की लोक गायन शैली ने राम को लोक का नायक बनाने में मदद की। उन्होंने लोगों के सामने राम को नए रूप में प्रस्तुत किया। उनके लेखन में राष्ट्रीय चेतना, नारी सशक्तिकरण और जातिवाद का खंडन जैसे मुद्दे ज्यादा प्रभावी तरीके से उठाए गए हैं। वह कहती हैं, राधेश्याम के राम ज्यादा अपने से लगते हैं, तुलसी के राम आदर्शवाद की कसौटी पर कसे जाते हैं। उनसे यह सवाल किया गया कि तुलसी कृत रामचरित मानस दुनिया में ज्यादा स्वीकृत है, तो पामेला ने सहमति जताई, लेकिन उनके मुताबिक राधेश्याम की रामायण में अभिव्यक्ति ज्यादा सरल और सहज रूप में होती है।

शोध के लिए देखने पहुंचीं रामलीला
धाराप्रवाह हिन्दी बोलने वाली पामेला वाचिक परंपरा पर विश्वास करती हैं। वह सुभाषनगर, मढ़ीनाथ, बनखंडी नाथ और बमनपुरी रामलीला में सक्रिय भागीदारी करने वाले लोगों से मिलती हैं, उनसे बात करती हैं और उसे नोट पैड पर नोट भी करती हैं। उनके शोध का विषय ‘इन रामाज किंगडम: द राधेश्याम रामायण एंड नेबरहुड रामलीला’ है। रविवार को ही वह शाहजहांपुर में रामलीला का मंचन देख कर आईं हैं। रामलीला में अधिकांश संवाद राधेश्याम रामायण पर ही आधारित होते हैं। वह अपने शोध पर 200 पन्ने लिख चुकी हैं। हालांकि उन्हें लिखने का बहुत समय नहीं मिलता, क्योंकि उनकी तीनों बेटियों जोई, उर्सिला और टालूला भी साथ ही रहती हैं। वह तीनों एसआर इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती हैं। यहां के स्कूलों में पढ़ाई के माहौल पर कक्षा आठ की छात्रा जोई की टिप्पणी थी, ‘बहुत अलग और कठिन है यहां की पढ़ाई।’

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उनके शोध को सुपरवाइज कर रहे दर्शन शास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. आरके गुप्ता कहते हैं, ‘पामेला ने जिस विषय को शोध के लिए चुना है, वह आम लोगों से जुड़ा है। उनमें जानने और समझने की प्रबल इच्छा है। खुशी इस बात की है कि वह हिन्दी बेहद अच्छी बोलती हैं। राधेश्याम रामायण को उनके शोध से नई पहचान मिलेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।’
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