सरसों के तेल की शक्ल में स्लो प्वाइजन

Bareilly Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। नकली सरसों का तेल दरअसल धान की भूसी के तेल में मिलावट करके तैयार किया जाता था। बिशारतगंज में यह धंधा तीन सालों से चल रहा था। नकली तेल के कारोबारी इस गोरखधंधे में सरसों के तेल के कई मशहूर ब्रांडों का इस्तेमाल कर रहा था। कभी अगर किसी ने अगर तेल पर आपत्ति भी जताई तो ब्रांड पर ही दोष मढ़कर वे उसे दूसरे ब्रांड के कनस्तर में नकली तेल थमा देते थे।
पुलिस ने कनस्तरों में भरा जो तेल बरामद किया, उन पर कानपुर की विभिन्न कंपनियों के स्टिकर लगे थे। इनमें सरनी, बंसीवाला, धनुष, धारा, गंगा, दीप, दो फूल और सूरज आदि ब्रांड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा था। चन्द्रभान और रिजवान ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि नकली तेल की सबसे ज्यादा खपत वे देहात के बाजारों में करते थे। शहर के भी कुछ व्यापारी भी बिशारतगंज से नकली तेल मंगाते थे। पुलिस इसके बाद इस धंधे में शामिल और लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस के मुताबिक बिशारतगंज में दूसरे राज्यों से टैंकरों के जरिये धान की भूसी का तेल मंगाया जाता था। धान की भूसी के तेल से ही नकली सरसों का तेल और रिफाइंड बनाया जाता था। अमूमन रात को ही वाहनों में तेल के कनस्तर लादकर बरेली और जिले के कस्बों में सप्लाई भेजी जाती थी। कम लागत में ज्यादा मुनाफे का धंधा चलाने वालों को लोगों की जान से कोई मतलब नहीं था।
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कैंसर हो सकता है इस तेल के सेवन से
तेल में बटर यलो कलर मिलाने से खाने वालों को कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। फेफड़े और गुर्दो की बीमारी से भी इंसान पीड़ित हो सकता है। इससे बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास भी रुक जाएगा। साबुन की मात्रा पेट में जाने से मुंह और खाने की नली में जख्म हो सकता है। डायरिया की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। पिघला हुआ मोम यदि खाद्य पदार्थ में है तो वह आंतों को जख्मी कर सकता है। कुल मिलाकर यह मिलावटी तेल जहर से कम नहीं है।
डॉ. शरद अग्रवाल, फिजीशियन
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इसलिए मिलाए जाते थे जहरीले तत्व
बटर यलो कलर- धान की भूसी के तेल का रंग सरसों के तेल जैसा करने के लिए।
मैदा व सीमेंट-तेल के बर्तन में नीचे जमने से लोग इसे सरसों के तेल का गाद समझें।
साबुन- एक बर्तन से दूसरे बर्तन में तेल पलटते समय झाग बने।
मोम- धान की भूसी के तेल में चिकनाई नहीं होती, मोम से चिकनाई पैदा होती है।
मिर्च- भूसी के तेल में झार नहीं होता, मिर्च डालने से आंखों में जलन के अहसास को झार समझा जाए।

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