विश्वविद्यालय प्रशासन से वार्ता विफल

Bareilly Updated Thu, 13 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। रूहेलखंड विश्वविद्यालय में शिक्षकों की बेमियादी भूख हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार भी पहुंचे।

दोनों नेताओं ने कुलपति और शिक्षकों के बीच वार्ता भी कराई। इस दौरान अधिकांश मुद्दों पर कुलपति ने अपनी सहमति दी लेकिन देर शाम रजिस्ट्रार की ओर से जो सहमति पत्र तैयार किया गया उसे शिक्षकों ने मानने से इनकार कर दिया। कहा कि जो बातें तय हुई थीं, वह इसमें नहीं है।

बैठक से हटे डॉ. जेटली
विश्वविद्यालय में बुधवार दोपहर कुलपति कार्यालय में आंदोलनरत शिक्षकों को बातचीत के लिए बुलाया गया। इस दौरान वहां डॉ. एके जेटली भी मौजूद रहे। इस पर शिक्षकों ने आपत्ति की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लाबिंग करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को समझते हुए डॉ. जेटली स्वयं बैठक से चले गए।
दो हड़ताली शिक्षकों की हालत बिगड़ी
भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. विजय बहादुर सिंह यादव और महामंत्री डॉ. यतेंद्र कुमार की हालत बिगड़ गई। सिटी मजिस्ट्रेट शीलधर यादव ने इन्हें अपनी निगरानी में अस्पताल पहुंचाया। इस बीच पांच अन्य शिक्षक डॉ. अनिल सिंह, डॉ. लक्षबीर सिंह, डॉ. मदन लाल, डॉ. अजय यादव और डॉ. राकेश मौर्या भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। देर शाम तक आंदोलनस्थल पर मौजूद शिक्षकों में डॉ. संजय सिंह, डॉ. ओपी उपाध्याय, डॉ. एनएन पांडेय, डॉ. अनिता त्यागी, डॉ. संतोष अरोड़ा, डॉ. शोभना, प्रो. नीलिमा गुप्ता आदि मौजूद रहीं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया दुखद : संतोष गंगवार
शिक्षकों को समर्थन देने के लिए पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने जो रवैया अपनाया वह दुखद है। यदि शिक्षक सरीखे प्रबुद्ध वर्ग को भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होना पड़ा तो निश्चित रूप से मामला गंभीर है। इस मामले में सूबे के उच्च शिक्षा सचिव से भी बात की जाएगी।
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रेगुलर नियुक्ति अब सेल्फ फाइनेंस में तब्दील
बरेली। विश्वविद्यालय में आंदोलनरत शिक्षकों की नाराजगी का सब से बड़ा कारण नियुक्ति पत्र में इंगित सेवा सर्तों को बदला जाना है। बताया जा रहा है कि इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी (आईईटी) की स्थापना के बाद वर्ष 2008 तक तमाम शैक्षिक और गैर शैक्षिक कर्मचारियों की भर्ती नियमित तौर पर की गई। इन्हें वेतनमान सहित अन्य लाभ भी समय समय पर मिलते रहे। प्रमोशन भी किये गये। इसके बावजूद पिछले दो वर्ष से विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन शिक्षकों को सेल्फ फाइनेंस वर्ग में रखने का हवाला देते हुए नियमित स्टाफ की सुविधाओं से वंचित कर दिया। बुधवार को आंदोलित शिक्षकों के बीच पहुंचे रजिस्ट्रार केएन पांडेय ने कहा कि उनसे इस मामले में चूक हुई है। वह लिखित तौर पर इसे स्वीकार कर चुके हैं लेकिन अब नियमों के आगे उनके हाथ बंधे हैं।

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