बागवां फिल्म की प्रेरणा से खोल दिया वृद्ध आश्रम

Bareilly Updated Wed, 12 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। बुढ़ापे में अपनापन और प्यार मिल जाए तो शायद इससे बड़ी नियामत कुछ और नहीं होती। कुछ इसी ओर कदम बढ़ाए हैं काशीधाम वृद्ध आश्रम ट्रस्ट ने। हार्टमैन स्कूल के पास वृद्ध आश्रम खोलकर। यहां बुजुर्गों के लिए पूजा-अर्चना की विशेष व्यवस्था तो है ही, वे अपने मनमुताबिक छोटे-मोटे काम करके अच्छे से समय भी बिताते हैं।

इस आश्रम की शुरुआत मई 2010 में काशीधाम वृद्ध आश्रम ट्रस्ट ने की थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण अग्रवाल अभी उतने बुजुर्ग नहीं हैं, लेकिन आश्रम खोलने की प्रेरणा कहां से मिली? कहते हैं कि बागवां फिल्म देखकर आश्रम खोलने का विचार मन में आया।

ट्रस्ट के सलाहकार शिव शंकर दयाल के सहयोग से ‘विचार’ को अमलीजामा पहना दिया। गोपाल कृष्ण जी से बात चल ही रही थी कि आश्रम के कॉमन रूम में आस्था चैनल देखने के लिए यहां रह रहे बुजुर्ग आ गए। कार्यक्रम देखने के बाद सभी ने अपनी-अपनी कहानी अपने तरह से बयां की।

कुछ समय पहले ही यहां आए 82 वर्षीय बुजुर्ग कृष्ण अवतार को घर में कोई परेशानी नहीं। बस, आश्रम में एक बार आए और फिर यहीं के होकर रह गए। इसी बीच बुजुर्ग हीरा लाल कॉमन रूम से उठकर मेन गेट की ओर बढ़ने लगे। एक गाय ठीक उसी समय रोज पानी पीने के लिए आती है। अपने सींग से गेट खटखटा रही थी, सो हीरालाल ने सुन लिया। उसे पानी पिलाने के बाद वापस आकर बोले, खाली बैठने का अब भी मन नहीं करता।

मुड़िया अहमद नगर के छोटे लाल बेटी की शादी की जिम्मेदारी से मुक्त हुए तो आश्रम में आ गए। अलबत्ता यहां रह रही गौरा देवी अपने बेटों से जरूर खफा दिखीं। इस समय आश्रम में सात बुजुर्ग हैं। अध्यक्ष गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं, ‘हमारे पास 40 बुजुर्गों के रहने का इंतजाम है। ट्रस्ट के सदस्यों समेत कुछ लोग मासिक चंदा देते हैं, जिससे खर्चा पूरा होता है।’

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