बारिश के बाद वायरल हिमोरैजिक बुखार का कहर

Bareilly Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू के बजाय इस बार वायरल हिमोरैजिक फीवर लोगों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। डेंगू से लक्षण वाले इस बुखार में भी प्लेटलेट्स काफी घट जाते हैं। आम तौर पर इस बुखार के शिकार लोगों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। दवाओं से ही मरीज ठीक हो जाता है। लेकिन तमाम अस्पतालों में प्राइवेट डॉक्टर इसे डेंगू बताकर मरीजों को खूब लूट रहे हैं।
डॉक्टर भी मानते हैं कि इस साल वायरल हिमोरैजिक फीवर का प्रकोप ज्यादा है। इसके शुरुआती लक्षण डेंगू सरीखे होते हैं, लेकिन चिकित्सकीय किट से होने वाले खून की जांच में डेंगू निगेटिव मिलता है। मतलब, डेंगू नहीं होता। सामान्यत: तीन प्रकार के वायरल हीमोरेजिक बुखार में खून में प्लेटलेट्स घटने लगते हैं और यह ज्यादा कम हो जाएं तो पेशाब, मल या मुंह से खून भी आने लगता है। जानकार डॉक्टरों का कहना है कि प्लेटलेट्स पचास हजार से कम होने के साथ खून आने की समस्या आने पर ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है। वहीं कई अस्पतालों में 75-80 हजार के स्तर पर पहुंचने पर ही प्लेटलेट्स चढ़ाने लगते हैं। जबकि, इस स्तर पर दवाओं से ही मरीज को लाभ पहुंचाया जा सकता है। बरेली के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम लोग हिमोरैजिक फीवर की चपेट में हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग इससे बेखबर है। सीएमओ एके त्यागी ने यह तो स्वीकार किया कि इन दिनों में हिमोरैजिक फीवर के लोग शिकार होते हैं। साथ ही इसके मरीज बहुत ही कम होने की बात उन्होंने कही, जबकि हकीकत एकदम उलट है। क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. रतन गंगवार के मुताबिक तेज बुखार आने पर तुरंत कंसलटेंट को दिखाना चाहिए। कोई डॉक्टर बिना जांच कराए डेंगू बता दे तो उससे घबराना नहीं चाहिए, बल्कि ब्लड टेस्ट रिपोर्ट आने का इंतजार करना चाहिए। वायरल हिमोरैजिक फीवर से पीड़ित ज्यादातर मरीजों को दवाओं से ही ठीक किया जा सकता है।


लक्षण
-तेज बुखार आने के साथ पेट में दर्द होना
-मल, मूत्र या मुंह कहीं से भी खून आना
- पूरे शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं
- अत्यधिक कमजोरी का महसूस होना

बचाव
- मक्खी और मच्छरों से बचाव करें।
- गड्ढों में पानी जमा न होने दें
- नालियों में भी पानी न रुका रहे
- घर के आसपास साफ-सफाई रखें



बीमारी की वजह
यह डेंगू और चिकन गुनिया की तरह का ही एक वाइरस है। यह मच्छरों से फैलता है। खांसने और छींकने पर भी एक इंसान से दूसरे में चला जाता है। पहले यह वाइरस वन्य जीवों में फैलता था। चूंकि, जंगल रहे नहीं और वन्यजीव भी कम होते जा रहे हैं। इसलिए अब यह वाइरस तेजी से इंसानों में फैल रहा है।

इलाज का तरीका
प्लेटलेट्स को नुकसान पहुचाने वाले दवाइयों से बचना। शरीर में पानी की मात्रा को पूरा करना। प्लेटलेट्स को बढ़ाने वाली दवाइयां देना। प्लेटलेट्स 50 हजार से कम होने के साथ ब्लीडिंग होने या तीस हजार से कम होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाना।

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