जंक्शन पर तड़पता रहा मुसाफिर, पौन घंटे बाद पहुंचे डॉक्टर

Bareilly Updated Sun, 09 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। नई दिल्ली-लखनऊ स्पेशल ट्रेन से धनेटा में एक यात्री का पैर कट गया। वह खुद ही इसी ट्रेन में सवार होकर जैसे-तैसे बरेली जंक्शन पर तो पहुंच गया, मगर वहां उसे काफी देर तक रेलवे डॉक्टर देखने नहीं आए। कंट्रोल रूम की सूचना पर मौके पर पहुंचे जीआरपी और आरपीएफ कर्मियों ने इस पर नाराजगी जाहिर की और पूरी स्थिति की जानकारी आला अफसरों को दी। तभी रेलवे डॉक्टर घायल को देखने आए। इसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक बताई है।
बिहार के जिला सीतामढ़ी के थाना बरगईयां के कोंटकिया गांव निवासी तोता कुमार उर्फ नत्थू (27) पुत्र वृंदा पासवान दिल्ली में नौकरी करता है। शनिवार को वह नई दिल्ली-लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन (04206) की जनरल बोगी में सवार होकर घर लौट रहा था। सुबह करीब 5.20 बजे सिग्नल डाउन न मिलने पर ट्रेन धनेटा स्टेशन पर रुक गई। यहां बोगी की खिड़की पर खड़ा नत्थू लघु शंका के लिए प्लेटफार्म पर उतर गया। इसी दौरान ट्रेन चल पड़ी। उसने चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की, तो एक चक्के की चपेट में आने से बांयी टांग कटकर नीचे गिर गई। वह उसी हालत में ट्रेन में चढ़ गया। हादसे की सूचना गार्ड ने मुरादाबाद कंट्रोल रूम को दे दी।
कंट्रोल की सूचना पर जीआरपी और आरपीएफ सतर्क हो गई। फौरन ही मेमो भेजकर रेलवे डॉक्टर को भी सूचना दे दी गई। सुबह 5.45 बजे जैसे ही ट्रेन बरेली जंक्शन पर आकर रुकी जीआरपी के जवानों ने घायल नत्थू को उतारकर प्लेटफार्म पर लिटा दिया। सूचना दिए जाने के बावजूद रेलवे अस्पताल के डॉक्टर वीपी गुप्ता खुद तो आए नहीं, फार्मासिस्ट मोहम्मद फहीम और ड्रेसर यतेंद्र लाकड़ा को भेज दिया। इन कर्मचारियों ने कटी हुई टांग में पट्टी बांध दी, लेकिन खून नहीं रुका। आधा घंटे तक डॉक्टर नहीं आए तो जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने ही स्टेशन पर यह कहते हुए हंगामा खड़ा कर दिया कि इससे पहले भी बुधवार को स्टेशन पर इलाज के अभाव में एक बुजुर्ग की मौत हो चुकी है। जीआरपी के दरोगा केके तिवारी ने मुरादाबाद कंट्रोल को फोन करके पूरी स्थिति बताई। इस पर आला अफसर सक्रिय हुए और वहां से लताड़ पड़ने पर करीब पौन घंटे बाद डॉक्टर घायल को देखने पहुंचे। उन्होेंने कागजों में नत्थू को रेलवे अस्पताल में भर्ती दिखाकर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। यहां बता दें कि जीआरपी और आरपीएफ किसी घायल को जिला अस्पताल में तभी भर्ती करा सकती है, जब उसे रेलवे डॉक्टर वहां के लिए रेफर कर दें।
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-ट्रेन से घायल होने पर बुलाओ तो डाक्टर आते ही नहीं हैं। वह फार्मासिस्ट को भेज देते हैं। कई बार ऐसा हो चुका है। - केके तिवारी, उप निरीक्षक, जीआरपी

-सुबह का समय था, इसलिए थोड़ी देर हो गई। स्टाफ ने तुरंत मौके पर पहुंचकर ड्रेसिंग कर दी थी।-डॉ. वीपी गुप्ता, चिकित्सा अधिकारी, रेलवे अस्पताल

- कंट्रोल से कोई भी सूचना आने पर फौरन ही संबंधित लोगों को उसकी जानकारी दे जाती है। घायलों के इलाज के लिए समय का ध्यान रखा जाना चाहिए- आदिल जिया सिददीकी, स्टेशन प्रबंधक

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