अंकगणित से किया था डेलापीर तालाब पर अतिक्रमण

Bareilly Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
अजय सक्सेना
बरेली। डेलापीर तालाब से मेयर डॉ. आईएस तोमर ने कब्जा तो हटवा दिया, मगर यह कब्जा हुआ कैसे था, इसका खुलासा मेयर की एक चिट्ठी से हुआ है। मेयर ने यह चिट्ठी सीबीआई जांच के लिए मेयर को लिखी है। साथ भेजी गई रिपोर्ट में उन्होंने खुलासा किया है कि जालसाजों ने पड़ोस की जमीन खरीदकर दोबारा रजिस्ट्री कराई तो उसमें ज्यादा क्षेत्रफल दिखा दिया और वह बढ़ा हुआ क्षेत्रफल तालाब की जगह वाला बताया जा रहा है।
डेलापीर तालाब से कब्जा हटाने का काम 29 अगस्त को शुरू हुआ था। कब्जा हट गया है, अब तो वहां निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। कब्जेदारों को करोड़ों रुपये की ‘चोट’ पहुंची है तो ऐसे में वे भी हाथ-पैर मारेंगे ही। यही जानते हुए मेयर ने इस बीच रिपोर्ट तैयार कराई। इसी रिपोर्ट को मुख्यमंत्री को भेजा गया है। कहा गया है कि मोहम्मद शाहिद व अन्य व्यक्तियों ने 1950 में बिहारमान नगला (डेलापीर) में तालाब के पड़ोस में नगर निगम से नीलामी में जमीन खरीदी थी। फिर इसे फरहत हुसैन को बेचा गया। बाद में फरहत हुसैन से यह जमीन शाहिद ने सलीम के साथ मिलकर खरीदी तो जमीन के क्षेत्रफल 6474 के शुरू में अंक 3 बढ़ाकर उसे 36474 वर्ग गज कर दिया। यानी 30 हजार वर्ग गज जमीन बढ़ गई। अब यह बढ़ी हुई जमीन भौतिक रूप से कहां से लाई जाती? इस सवाल का जवाब उनके पास पहले से था, डेलापीर तालाब। नगर निगम के तालाब को अपनी जमीन बताते हुए ही लगातार कब्जे किए गए।

एडिशनल कमिश्नर के कोर्ट में गया था मामला
कागजों में जमीन 36474 वर्ग गज दिखाए जाने के बाद मामला रणनीति के तहत एडिशनल कमिश्नर के कोर्ट में ले जाया गया। वहां से एक पक्षीय आदेश के बाद जमीन पर कब्जा कर लिया गया। उसके बाद कब्जेदारों के चेहरे जरूर बदलते रहे, कब्जा वैसे ही चलता रहा। भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2005 में पुलिस थाने में कब्जे की एफआईआर भी कराई गई, मगर राजनीतिक दबाव के चलते फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। जबकि, राजस्व अभिलेखों में अभी भी यह तालाब के रूप में ही दर्ज है। तालाब की चार हजार वर्ग गज जमीन को अतिक्रमणकारियों ने पाटा था। बताते हैं कि मेयर यह रिपोर्ट पाटी गई करीब चार हजार वर्ग गज जमीन को खाली कराने से पहले ही भेजना चाहते थे, मगर शहर में कर्फ्यू लगने के कारण नहीं भेजी जा सकी थी। अब काम शुरू कराने के साथ ही रिपोर्ट मेयर ने भेज दी। मेयर का यह भी कहना है कि शासन को पहले भी इस स्थिति के बारे में बताया गया था, लेकिन मामला दब गया। शाहिद सपा का नेता बताया जाता है, हालांकि रिपोर्ट में ऐसा उल्लेख नहीं है। तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर और पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।

दो आईएएस अधिकारियों भी चर्चा में
तालाब की जमीन की खरीद फरोख्त करके करोड़ों रुपये का खेल करते आए लोगों में दो आईएएस अधिकारियों के भी शामिल होने की चर्चाएं नगर निगम के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बीच है। हालांकि इनके नाम कोई अपनी जुबां पर लाने को तैयार नहीं है।

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