कर्फ्यू में खूब मुनाफा बटोर रहे सब्जी कारोबारी

Bareilly Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
राजेश तोमर
बरेली। कर्फ्यू के दौरान शहर में महंगी सब्जी बेचकर कारोबारी जहां खूब मुनाफा बटोर रहे हैं, वहीं वे इन सब्जियों को किसानों से बेहद सस्ते दामों पर खरीद रहे हैं। इतने सस्ते दामों पर कि सब्जी उत्पादक किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट आन पड़ा है। लेकिन, किसानों के पास इन्हें सब्जी देने के अलावा कोई और चारा भी नहीं है, क्योंकि देहात के बाजारों में इनकी कीमत काफी गिर गई है। मंडी में आवक कम होने से हाल यह हो गया है कि खेतों में सब्जियां सड़ रही हैं। शहर से नरियावल महज सात किलोमीटर के अंतर पर हैं और इतनी दूरी पर ही सब्जी के दामों में चार गुने तक का अंतर है।
कर्फ्यू का असल खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। देहात से सब्जियां बिकने के लिए शहर में नहीं आ पाने से किसानों ने सब्जियां खेतों में ही छोड़ दी है। इसकी वजह से लौकी, मूली, तोरई, पालक आदि सब्जियां खेतों में सड़ रही हैं। जिले के देहात क्षेत्र से शहर की मंडियों में जहां रोजाना आठ सौ टन सब्जी की आवक होती थी। लेकिन, पिछले एक महीने में यह आवक कम हो गई है। नरियावल और आसपास बाजारों में सब्जी इतनी सस्ती है कि लागत तक नहीं निकल रही। किसानों का कहना है कि लागत के लिए कर्ज लिया था, अब समझ नहीं आ रहा कि इसे कैसे चुकाएंगे। वहीं शहर के कारोबारी इसी सब्जी को सस्ते में खरीदकर चार गुने दामों पर बेच रहे हैं।
शहर के समीपवर्ती गांव आलमपुर के मुश्ताक अहमद का आठ बीघा खेत है। जिसमें सब्जी पैदा करके पांच सदस्यों वाले उनके परिवार का गुजारा होता है। उन्होंने ढाई माह पूर्व खेत में तोरई, कद्दू, लौकी, टिंडा और भिंडी लगाई थी। बकौल मुश्ताक, लागत के लिए कर्जा लेना पड़ा। उपज की बिक्री शहर की मंडियों में करते थे, लेकिन पिछले 24-25 दिनों से माल मंडी नहीं भेज पाए। जो कारोबारी माल लेने आ रहे हैं, वे आम दिनों की तरह दाम नहीं दे रहे हैं। कह देते हैं कि शहर में माल बिक ही नहीं रहा है, इसलिए सस्ते में देना हो तो दे दो।
इसी गांव के कृषक रोशन लाल उपज की बिक्री नहीं होने से चिंता में दिखे। उन्होंने बताया कि मंडी में हर तीसरे दिन माल भेजते थे। सीजन में कोई परेशानी नहीं रहती थी, मगर इस बार छह बीघा खेत में कद्दू और चचेड़ा बेकार हो रहे हैं। नरियावल की बाजार में बेचने से मजदूरों की मजदूरी और ढुलाई का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा है। ठिरिया निवासी कृषक भूरा का कहना था कि मंडी में भिंडी, लौकी, तोरई आदि नहीं भेज पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों की बाजारों में इतनी खपत नहीं होती। उन्होंने बताया कि छह महीने के खर्चे का इंतजाम इसी सीजन में कर लेते थे। इस बार परिवार का खर्चा चलाने में काफी दिक्कत होगी।
यहीं के लईक अहमद ने बताया कि इस बार अलग हटकर पेठा की खेती अपनाई। सोचा था कि मंडी में भाव अच्छा मिलेगा और अगले दिनों में बिटिया की होने वाले निकाह में काफी आसानी रहेगी, लेकिन पेठा लेने के लिए शहर से आने वाले कारोबारी काफी कम दाम दे रहे हैं।



नरियावल के भाव शहर के भाव

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आलू पुराना 10 रुपये किलो 20 रुपये किलो
आलू नया पहाड़ी 20 रुपये किलो 30 रुपये किलो
करेला 08 रुपये किलो 25 रुपये किलो
लौकी 10 रुपये की चार किलो 10 रुपये किलो
तोरई 10 रुपये की दो किलो 15-20 रुपये किलो
चचेड़ा 10 रुपये किलो 20 रुपये किलो
कद्दू 08 रुपये किलो 20 रुपये किलो
खीरा 10 रुपये किलो 20 रुपये किलो
टमाटर 30 रुपये किलो 40 रुपये किलो
भिंडी 12 रुपये किलो 20 रुपये किलो
हरी मिर्च 40 रुपये किलो 80 रुपये किलो
अरबी 15 रुपये किलो 20 रुपये किलो
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इनसेट
रोजाना बीस टन करेला भेजा जा रहा मध्य प्रदेश
बरेली। कर्फ्यू से जहां आम आदमी सब्जियों के लिए परेशान है, वहीं कुछ सब्जी व्यवसायियों ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के व्यापारियों से संपर्क साधने में समय जाया नहीं किया। इलाके के करेला की विशेषता बताकर आपूर्ति का जिम्मा ले लिया। नरियावल के व्यापारी कमरुद्दीन ने बताया कि रोजाना करीब बीस टन करेला ग्वालियर के लिए भेजा जाता है।

शहर की मंडियों में इन स्थानों से आती है सब्जी
फरीदपुर, पचौमी, टिसुआ, नरियावल, बिथरी, मीरगंज, करगैना, भोजीपुरा, देवरनियां, रिठौरा, महेशपुरा, आलमपुर, ठिरिया

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