घरों से समय से नहीं निकल सके लोग

Bareilly Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
बरेली। पुलिस और प्रशासन के अफसर बृहस्पतिवार को कर्फ्यू में ढील के बाबत पहले से लोगों को जानकारी ही नहीं दे पाए। यही वजह रही कि ढील शुरू होने के काफी देर बाद लोग घरों से बाजार के लिए निकल सके। शुरुआती आधे घंटे में बाजार में काफी कम भीड़ दिखी। हालांकि, प्रशासन ने पब्लिक एड्रेस सिस्टम और जीप में लगे माइक से ढील की सूचना दिए जाने का दावा किया था। छूट की जानकारी लेने के लिए बुधवार को मीडिया कर्मियों के पास काफी फोन आते रहे।
सन् 2010 में कंट्रोल रूम में बैठकर जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाया गया था। शहर में 35 स्थानों पर यह सिस्टम लगाए गए हैं। बृहस्पतिवार की शाम करीब चार बजे इसी पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर कमिश्नर ने शांति व्यवस्था कायम रखने और उपद्रवियों से सख्ती से निपटने का संदेश दिया तो तमाम लोगों ने इसे सुना। लेकिन, सही बात तो यह है कि बुधवार को इस सिस्टम का सही से इस्तेमाल ही नहीं किया गया। नतीजतन, लोगों को बृहस्पतिवार को दी गई ढील के बारे में बुधवार की देर रात तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
बुधवार को समाचार पत्रों के कार्यालय बंद होने के कारण बृहस्पतिवार को अखबार नहीं बंटे। कोहाड़ापीर पुलिस चौकी पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगा है, लेकिन सामने ही स्थित बानखाने के लोगों को कर्फ्यू में ढील की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। बानखाना के मो. यूसुफ का कहना है कि उन्हें तो चौकी पर कोई लाउडस्पीकर लगे होने की आज तक जानकारी ही नहीं है, क्योंकि इसकी आवाज कभी उनके घर तक नहीं आई। किला चौकी के पास भी एड्रेस सिस्टम लगा है। इसके नजदीक में ही लाइन पार बाकरगंज के रहने वाले मो. इकबाल ने बताया कि कर्फ्यू में ढील के बाबत उन्होंने अपने पढ़े लिखे दोस्तों को फोन किया, मगर कोई कुछ नहीं बता पाया। उन्होंने सोचा था कि इन दोस्तों के कुछ अफसर या मीडिया वाले दोस्त होंगे, इसलिए जानकारी मिल जाएगी। मढ़ीनाथ में भी एड्रेस सिस्टम लगा है। यहां के हरेंद्र कहते हैं कि कई बार सुबह और शाम को यहां के सिस्टम से हुई घोषणा उनके घर तक आ जाती है, मगर बुधवार को कर्फ्यू के बाबत कोई जानकारी उनके घर तक नहीं पहुंची। सूफी टोला के शराफत हुसैन और नर्गिस ने बताया कि उनके आसपास कहीं भी पुलिस की घोषणा नहीं सुनाई पड़ी। दूसरों को फोन करके उन्होंने ढील के बारे पता किया। शहामतगंज की सुकरा बी ने बताया कि एक पत्रकार के माध्यम से उन्हें ढील की जानकारी मिली। कमोबेश सभी इलाकों में लोगों को पब्लिक एड्रेस सिस्टम से कर्फ्यू में ढील की जानकारी नहीं मिली। अलबत्ता, बिहारीपुर करोलान के मुस्तफा ने एक निजी एफएम रेडियो पर ढील की सूचना सुनी थी। उन्होंने बताया कि उनके तमाम दोस्तों को भी एफएम रेडियो से ही छूट की जानकारी मिल सकी। आकाशवाणी के एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि उन्हें प्रशासन की ओर से लिखित रूप से ढील की कोई सूचना नहीं मिली थी। इस वजह से ढील की सूचना का प्रसारण नहीं कर सके।

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