फास्ट फूड से गिरता है हीमोग्लोबिन का स्तर

Bareilly Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
बरेली। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी का सब से बड़ा कारण है फास्ट फूड और बदल रही खानपान की प्रवृत्ति। जंक फूड के अधिक प्रयोग से शरीर मेें खून बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। धीरे-धीरे खून की कमी के साथ हीमोग्लोबिन का भी स्तर कम हो जाता है। यह जानकारी बीएचयू से आए प्रो. केके गुप्ता ने दी। वह आईएमए ब्लड बैंक में ‘ब्लड ट्रांसफ्यूजन क्लीनिकल ऑस्पेक्ट’ पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रक्त की एक बूंद कई मरीजों के लिए जीवन देने वाली साबित हो सकती है।
सेमिनार में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि रक्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता। प्रोफेसर केके गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में रक्तदान कर सकता है। बस उसे डायबिटीज नहीं होना चाहिए और न ही एल्कोहॉलिक। मैक्स अस्पताल के डॉ. संगीता पाठक ने रक्त चढ़ाने के बाद होने वाले रिएक्शन के खतरों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि हम पांच महत्वपूर्ण इन्फेक्शन की जांच करते हैं। इसमें हेपेटाइटिस बी भी शामिल है। मुंबई से आए डॉ. राजेश देशपांडे ने कहा कि शरीर में श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्लूबीसी) के बढ़ जाने से तमाम व्याधियां होने का खतरा रहता है। लखनऊ से आए डॉ. आशीष तिवारी ने प्लेटलेट्स एवं एफएफपी का सही उपयोग की जानकारी दी। कार्यक्रम मेें डॉ. अतुल सोनकर ने कहा कि डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने के बाद मरीज परेशान हो जाते हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि ब्लीडिंग न होने पर प्लेटलेट्स की मात्रा 10 हजार तक भी आ जाए तो दिक्कत नहीं होगी। सेमिनार का आयोजन आईएमए ब्लड बैंक के सिल्वर जुबली ईयर पूरे करने पर किया गया। सेमिनार के अंत में विशेषज्ञों से मौजूद लोगों ने सवाल भी पूछे। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अंशु अग्रवाल ने कर्फ्यू की वजह से स्थगित हो गए कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस मौके पर आईएमए की निदेशक डॉ. अंजू उप्पल ने सभी का आभार जताया।


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घातक हो सकती हैं अधिक श्वेत रुधिर कणिकाएं
मुंबई से आए डॉ. राजेश देश पांडे ने कहा कि श्वेत रुधिर कणिकाओं की मात्रा बढ़ने पर रिएक्शन भी हो सकता है, इसलीए फिल्टर और इफैरेसिस विधि से वह सेल्स निकाल दी जाती हैं। यदि मरीज को डेंगू हो तो प्लेटलेट्स को आटोमेटेड इन्स्ट्रक्टर के माध्यम से चढ़ाते हैं।

डोनर की जांच जरूरी
डॉ. संगीता पाठक ने कहा कि रक्त अवयवों में प्लेटलेट्स चढ़ाने पर इन्फेक्शन की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इसलिए मरीज को जब रक्त के अवयवों की जरूरत हो तभी चढ़ाना चाहिए। ब्लड चढ़ाने के पहले डोनर की पूरी जांच की जानी चाहिए।

रक्तदान से कोई नुकसान नहीं
बीएचयू के प्रो. केके गुप्ता ने कहा कि रक्त चढ़ाने को लेकर तमाम भ्रांतियां हैं। लोग रक्तदान से डरते हैं। जबकि रक्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता है। देश में रक्त की बेहद कमी है। इसे दूर करने के लिए तकनीकी के विकास के साथ ही लोगों के माइंड सेट को भी बदलना होगा।

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