जल्द ही शहर में हो सकेगी खाद्य नमूनों की जांच

Bareilly Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
बरेली। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की ओर से लिए गए नमूनों की जांच जल्द ही आईवीआरआई में हो सकेगी। शुक्रवार को यहां की प्रयोगशालाओं का जायजा लेने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन के. चंद्रमौलि पहुंचे। वैज्ञानिकों ने बताया कि एक ही प्रयोगशाला में सारी सुविधाएं दी जा सकती हैं, बशर्ते अथॉरिटी उन्हें उपकरण खरीदने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दे दे। इस पर चेयरपर्सन का रुख सकारात्मक रहा।
खाने-पीने की जिन चीजों के नमूने एफएसडीए लेता है, उन्हें जांच के लिए लखनऊ की लैब में भेजा जाता है। इससे एक तो जांच रिपोर्ट समय से नहीं मिल पाती, दूसरे ब्रेड वगैरह की जांच सही से नहीं हो पाती। वजह, इसके लखनऊ पहुंचने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है। तब तक इस पर फंगस (फफूंद) जम चुकी होती है। इन्हीं सब दिक्कतों के मद्देनजर बरेली या आसपास ही लैब खोलने की लंबे समय से मांग की जा रही है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी इस मांग पर विचार शुरू कर दिया है। उसके चेयरपर्सन के. चंद्रमौलि सुबह 11 बजे आईवीआरआई पहुंच गए। एफएसडीए की स्थानीय टीम भी उनके साथ रही। उन्होंने एलपीटी (लाइवस्टॉक प्रोडेक्ट टेक्नोलॉजी), वीपीएच (वेटरिनरी पब्लिक हेल्थ) डिवीजन और एटिक (एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन सेंटर) बिल्डिंग का जायजा लिया।
आईवीआरआई के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया, ‘हमने के. चंद्रमौलि को बता दिया कि हमारे यहां खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सभी जरूरी यंत्र हैं, लेकिन ये अलग-अलग प्रयोगशालाओं में हैं। एक ही प्रयोगशाला में सभी यंत्र लगाने के लिए कम से कम पांच करोड़ रुपये चाहिए। यह रकम मिलने पर एक महीने के भीतर हम जांच शुरू कर सकते हैं। के. चंद्रमौलि मिल्क और मीट प्रोडेक्ट्स की यहां जांच कराने में ज्यादा रुचि ले रहे थे।’ सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अथॉरिटी जल्द ही आईवीआरआई के साथ एमओयू पर साइन करने के मूड में है। आईवीआरआई के पीआरओ कुंदन सिंह ने बताया कि अथॉरिटी के चेयरपर्सन प्रयोगशालाओं का जायजा लेने के बाद दिन में दो बजे चले गए।

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