बच्चों को अभी भी कर्फ्यू का खामियाजा भुगतना बाकी

Bareilly Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
बरेली। स्कूलों में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत ही इस बार देर से हुई। जुलाई की शुरूआत में गर्मी इतनी ज्यादा थी कि जिला प्रशासन ने स्कूल खोलने पर रोक लगा दी। नए शिक्षा सत्र के लिए स्कूल दो जुलाई के बजाय नौ जुलाई को खुल पाए। कुछ और वक्त बच्चों और कक्षाओं को एडजस्ट करने में लगा। इसके बाद बमुश्किल एक हफ्ते ही पढ़ाई हो पाई कि दंगा हो गया और स्कूल फिर बंद हो गए। यह वक्त सभी स्कूलों में फॉर्मेटिव एसिसमेंट-2 की परीक्षाओं की तैयारियों का था, लेकिन सभी स्कूल अभी तक बंद पड़े हैं। दरअसल पूरा एकेडमिक कैलेंडर ही बुरी तरह पिछड़ चुका है। स्कूलों के लिए उसे किसी तरह लागू करना तो मुश्किल होगा ही, लेकिन जुलाई का तकरीबन पूरा महीना छुटिटयों में गुजर जाने का असल खामियाजा बच्चों को भुगतना होगा। उन्हें परीक्षाओं की तैयारी के लिए काफी कम वक्त मिल पाएगा। टीचर्स के लिए भी यह चुनौती होगी कि कम वक्त में वे कैसे परीक्षाओं की तैयारी करा पाएंगे।

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अतिरिक्त गतिविधियों में करेंगे कटौती
किसी तरह से फॉरमेटिव एसिसमेंट-1 की तो परीक्षाएं हो गईं, लेकिन उसके बाद जुलाई में पढ़ाई शुरू ही नहीं हो पाई। इसकी वजह से एफए-2 लेट हो जाएगा। इसकी परीक्षाएं अगस्त के अंत तक हो जानी चाहिए, लेकिन अब सितंबर में हो पाएंगी। बच्चों को सिलेबस पूरा कराने के लिए अतिरिक्त गतिविधियों में से ही समय निकालना पड़ेगा।
एसके सक्सेना, प्रिंसिपल आर्मी पब्लिक स्कूल

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अब रिवीजन होना भी मुमकिन नहीं
जुलाई में पहले तो गर्मी की वजह से पढ़ाई नहीं हो पाई और बाद में कर्फ्यू की वजह से स्कूल बंद हो गए। जुलाई में सिर्फ एक हफ्ते ही बच्चे पढ़ाई कर पाए। ऐसे में उनकी पढ़ाई के साथ ही परीक्षाएं भी आगे बढ़ानी पड़ेंगी। पहले रिवीजन कराकर आराम से परीक्षाएं होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। कोर्स पूरा कराना काफी मुश्किल होगा।
ग्रेस जोस, प्रिंसिपल जीआरएम
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अब तो पूरा साल ही पिछड़ गए
जुलाई की पढ़ाई काफी खास होती है। उसमें देर होने का मतलब है पूरा साल पिछड़ना। अब पिछड़ तो गए ही हैं। इसके लिए बच्चों को अतिरिक्त मेहनत करानी होगी, ताकि उनका नुकसान न हो। सबसे ज्यादा मुश्किल तो यह है कि सिलेबस को कैसे पूरा कराया जाएगा। एक ही रास्ता है कि बच्चों के खेलकूद के समय में ही कटौती कर पढ़ाई में इस्तेमाल किया जाए।
फादर ग्रेगरी मास्करहेंस प्रिंसिपल, बिशप कोनरॉड
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बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ेगा
अब जुलाई तो गई, आगे के महीने देखने होंगे। बच्चों का हर सोमवार को टेस्ट होता है। लेकिन अब एक हफ्ते में दो टेस्ट कराने होंगे। ताकि हर एक टर्म के सिलेबस को पूरा पढ़ा पाएं। इसके अलावा पढ़ाई से इतर जो दूसरे पीरियड हैं, उनमें अब सिर्फ पढ़ाई कराई जाएगी। कुल मिलाकर बच्चों का बोझ बढ़ जाएगा। उन्हें पूरा कोर्स एक साथ पढ़ाना होगा।
टी खान, प्रिंसिपल, जेएलए स्कूल

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