रेलवे कर्मी के घर में दिनदहाड़े चोरी

Bareilly Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
बरेली। इज्जतनगर की न्यू मॉडल रेलवे कॉलोनी में एक कर्मचारी को घर में ताला लगाकर रक्षाबंधन के लिए पत्नी के साथ ससुराल जाना काफी महंगा पड़ा। पीछे दिनदहाड़े चोर उनके घर में घुसे और नकदी-जेवर समेत करीब चार लाख रुपये कीमत का माल चुरा ले गए। शाम को घर लौटने के बाद रेलवे कर्मचारी को चोरी का पता लगा। उसने पुलिस को तहरीर दे दी है।
एनई रेलवे वर्कशॉप में बतौर टेक्नीशियन थर्ड तैनात श्यामा चरण कश्यप बृहस्पतिवार को सुबह करीब दस बजे घर में ताला डालने के बाद पत्नी कुसुम और बच्चों के साथ अपनी ससुराल अटामांडा चले गए थे। दोपहर करीब तीन बजे लौटने के बाद ताला खोलकर घर के अंदर घुसे तो सारा नजारा बदला हुआ सा दिखा। बिस्तर बेड से नीचे पड़ा था। कमरों में कपड़े और बाकी दूसरा सारा सामान भी फैला हुआ था। अलमारी के ताले टूटे हुए थे और पीछे का दरवाजा भी।
घर में चोरी का एहसास होने के बाद श्यामाचरण ने जांच की तो अलमारी में रखे करीब 20 हजार रुपये नगद, सोने की चूड़ियां, कंगन, दो चेन, कुंडल, चांदी के दो बिछुआ, चार सिक्के, बेटी साक्षी की गुल्लक के करीब 30 हजार रुपये, सोने की चेन, बेटे राज के पांच जोड़ी कड़े, सोने के दो दाने, चांदी की तीन करधनी और एक मोबाइल समेत करीब चार लाख रुपये का माल गायब था। श्यामाचरण के घर में आगे और पीछे दोनों तरफ दरवाजे हैं। घर का आंगन भी पीछे है। श्यामाचरण के मुताबिक चोर टंकी के पाइप के सहारे चहारदीवारी दीवारी कूदकर अंदर पहुंचे थे। दीवार पर पैरों के निशान भी बने थे। घर में एक बगैर हैंडिल का फावड़ा पड़ा मिला। संभवत: चोरों ने इसी से पीछे का दरवाजा और अलमारी के ताले तोड़े थे। घर के पीछे तमाम पेड़ और झाड़ियां हैं। शायद इसी वजह से चोरों को आते-जाते कोई देख नहीं पाया। सूचना दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची इज्जतनगर पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। मगर कोई सुराग नहीं लग सका।

पड़ोस में हुई चोरी से सबक नहीं लिया
श्यामाचरण के पड़ोस में रहने वाली जयंती शुक्ला रेलवे में बाबू हैं। एक अगस्त की सुबह दस बजे वह ड्यूटी गईं थी। शाम को पांच बजे लौटीं तो पीछे का दरवाजा टूटा हुआ और सारा सामान फैला पड़ा था। उनके घर से चोर एक हजार रुपये और चांदी के सिक्के ले गए थे। जेवर बैंक के लॉकर में पड़ा होने की वजह से बच गया। बृहस्पतिवार सुबह जयंती को जब श्यामाचरण के परिवार समेत बाहर जाने का पता लगा तो उन्होंने उनकी पत्नी सुमन को घर बंद करके जाने को मना किया, लेकिन वह नहीं मानीं। श्यामाचरण ने भी सुमन को अकेले ही मायके चले जाने को समझाया, लेकिन उन्होंने इसे भी स्वीकार नहीं किया।

गुल्लक खाली मिली तो गुमसुम हुए बच्चे
श्यामाचरण की साढ़े छह साल की बेटी साक्षी ने साइकिल और झुमकी खरीदने को रुपये जोड़े थे। उसे जो भी पैसे मिलते उन्हें वह गुल्लक में डाल देती थी। वेतन मिलने पर हर महीने श्यामाचारण बच्चों को पांच सौ रुपये देते थे। बेटे राज ने भी कुछ पैसे जोड़कर रखे थे। सुमन ने बताया दोनों बच्चे काफी देर तक रोते रहे। दोनों ने खाना तक नहीं खाया। श्यामाचरण ने घर से जाते समय पड़ोसियों को भी कुछ बताया नहीं था। उनके बराबर में रेलवे में क्लर्क अलका का आवास है। दोपहर 12-1 बजे के बीच अलका ने खटपट की आवाज सुनी मगर समझा कि श्यामाचरण के घर में कुछ काम हो रहा होगा। शाम को उन्होंने चोरी होने की सुनी तो सन्न रह गईं।

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