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कर्फ्यूग्रस्त शहर में डायरिया की एंट्री

Bareilly Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
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बरेली। बरसात का मौसम, उस पर शहर में उपद्रव के बाद सप्ताह भर का कर्फ्यू। इसी का एक साइड इफेक्ट है कि शहर के कई इलाकों में तमाम लोगों ने डायरिया ने चपेट में ले लिया है। जिला अस्पताल में रोजाना डायरिया के कई-कई मरीज आने की वजह से स्पेशल वार्ड बना दिया गया है। इन मरीजों में ज्यादातर बच्चे हैं। घनी आबादी वाले इलाकों में डायरिया का प्रकोप ज्यादा है।
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कर्फ्यू की वजह से पूरे शहर में गंदगी तो बढ़ी ही है, लोगों को बासी खाने और दूषित पानी का इस्तेमाल करने पर भी मजबूर होना पड़ा है। डॉक्टरों का मानना है कि डायरिया फैलने के लिए यही वजहें जिम्मेदार हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी के आंकड़ों के मुताबिक इन दिनों अस्पताल आने वाले मरीजों में से करीब 50 फीसदी डायरिया से पीड़ित हैं। हालत यह है कि तीन-चार दिनों के ही अंदर 25 बच्चों को डायरिया वार्ड में भर्ती किया गया है। इनमें से कई की हालत काफी गंभीर थी।
शनिवार को भी डायरिया वार्ड में कई बच्चे भर्ती हुए। बड़ी बमनपुरी के सचिन की चार वर्षीय बेटी आशी को सुबह साढ़े चार बजे अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गए। घरेलू इलाज से कुछ नहीं हुआ तो घबराई हालत में वह उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने आशी को डायरिया वार्ड में भर्ती कर लिया। कुमार टॉकीज के पास रहने वाले संजीव दो दिन पहले ही एक साल के बेटे नैतिक को डायरिया वार्ड से डिस्चार्ड कराकर की स्थिति ज्यादा खराब है, उसे दो दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर ले गए थे, लेकिन 27 जुलाई को उसे फिर दस्त शुरू हो गए। शनिवार को उन्होंने उसे फिर अस्पताल भर्ती करा दिया। सिकलापुर की शिवानी, चौपुला के डेढ़ साल के वंश और ब्रह्मपुरा की खुमनिया समेत कई बच्चे कई दिनों से डायरिया वार्ड में भर्ती हैं, लेकिन अभी भी उनकी हालत ठीक नहीं है। वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद सिस्टर फ्लोरेंस और स्टाफ नर्स सुनयना के मुताबिक कई बच्चों की हालत गंभीर है। उन्हें लगातार ड्रिप चढ़ाई जा रही है, साथ ही ओआरएस घोल दिया जा रहा है।


गंदगी और मक्खियां फैलाती हैं डायरिया
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. शरद अग्रवाल के मुताबिक बरसात के मौसम में गंदगी बढ़ने और पानी जमा होने से मक्खियां पनपती हैं जो खुले में रखे खाने-फल आदि पर बैठकर उसे दूषित कर देती हैं। बासी खाना और गंदा पानी इस्तेमाल करना भी डायरिया की खास वजह होता है। उन्होंने बताया कि बरसात में एक जगह जमा गंदा पानी रिसकर जमीन के अंदर पहुंचता तो जमीन के अंदर पानी का पहली परत भी गंदा हो जाती है। हैंडपंपों पर निर्भर रहने वाले लोग इसी पानी को पीते हैं, जिससे डायरिया का संक्रमण फैलने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

एहतियात बरतें तो बचना आसान
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक बारिश के मौसम में साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाना चाहिए। पानी को उबालकर ही पिया जाए। सड़े-गले फल-सब्जी और बासी खाने से पूरी तरह परहेज रखा जाए तो डायरिया नहीं होगा। इसके अलावा बरसात का पानी भी आसपास जमा नहीं होने देना चाहिए। डायरिया का संक्रमण होने पर जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए। छोटे बच्चों को बाहर का खाना देने के बजाय मां का दूध ही पिलाया जाए तो वे ज्यादा सुरक्षित रहते हैं।

‘शहर के कई इलाकों से डायरिया से पीड़ित बच्चे अस्पताल में आ रहे हैं। हमने एहतियात के तौर पर बच्चा वार्ड में डायरिया वार्ड को अलग कर दिया है ताकि वार्ड में मौजूद दूसरे बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सके।’ - डॉ. विजय यादव, चिकित्सा अधीक्षक

फ्लैग: घाटे से बचने को शहरियों की सेहत पर दांव
नामचीन दुकानों पर बासी-खराब मिठाई

एफएसडीए ने डेढ़ क्विंटल मिठाई फिंकवाई
डीएम के आदेश पर शहर में मारे गए छापे

बरेली। करीब सप्ताह भर तक उपद्रव ग्रस्त रहे शहर में घाटे को मुनाफे में बदलने का खेल शुरू हो गया है। कर्फ्यू में छूट के दौरान सबसे ज्यादा खरीदारी खाने-पीने की चीजों की हो रही है, इसी का फायदा उठाकर उन्हें बासी और खराब हो चुकी चीजें भी बेची जा रही है। शनिवार को डीएम के आदेश पर एफएसडीए की टीम ने शहर में छापे मारे तो कई नामचीन दुकानों पर ऐसी मिठाई पकड़ी गई, जिसका इस्तेमाल सेहत के लिए सुरक्षित नहीं रह गया था। करीब एक क्विंटल मिठाई फिंकवा दी गई।
कर्फ्यू के दौरान एक सप्ताह तक बाजार बंद रहा, लिहाजा मिठाई और खाने-पीने की दूसरी चीजों का स्टॉक खराब हो गया। शनिवार को कर्फ्यू में चार घंटे की छूट मिली तो ज्यादातर दुकानों पर यही माल बेचना शुरू कर दिया गया। कई दुकानों के बाहर तो न सिर्फ स्टॉल लगा लिए गए, बल्कि बासी मिठाइयों का रेट भी कुछ कम कर दिया गया। दोपहर एफएसडीए की टीम ने छापे मारने शुरू किए तो अजंता, ग्लोरी, किप्स, पीके नमकीन, कमल डेरी, दीपक स्वीट्स, प्रकाश स्वीट्स, बृजवासी, किप्स सुपर मार्केट गनगौर आदि कई नामचीन अदुकानों पर बासी मिठाई की बिक्री होते पाई।
एफएसडीए के अफसरों ने इस मिठाई को अपने सामने ही फिंकवा दिया। दुकानों की तलाशी भी ली गई ताकि बासी मिठाई का स्टॉक न रह जाए। इसके अलावा कोहाड़ापीर इलाके में भी कई दुकानों से बासी मिठाई फिंकवाई गई। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि सभी दुकानदारों को कड़ी हिदायत दे दी है। उन्हें बासी मिठाई न रखने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि एफएसडीए की टीम लगातार चेकिंग करेगी। अब किसी दुकान पर बासी मिठाई पाई गई तो दुकानदार के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।


देखभाल के बाद ही खरीदें मिठाई
एफएसडीए की कार्रवाई के बाद भी मुश्किल ही है कि दुकानदार बासी और खराब मिठाई बेचने से बाज आ जाएं। चूंकि त्योहारों का मौका है, लिहाजा किसी न किसी तरह ये मिठाइयां बेचकर मुनाफा कमाने की कोशिश की ही जा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि मिठाई खरीदनी हो तो अच्छी तरह देखभाल कर लें ताकि खराब मिठाई खाने से सेहत खराब होने का खतरा न रहे।

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