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पीएचसी में भी होगा प्रसूता की बेहतर देखभाल

Bareilly Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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बरेली। अब प्रसूता की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी बेहतर देखभाल की जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही जननी सुरक्षा योजना में कुछ बदलाव किया गया है। जिले के सभी ब्लाक में 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और तहसीलों में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिलाओं को सामान्य प्रसव के बाद तीन दिन और ऑपरेशन वाली महिलाओं को सात दिन तक रुकने की सुविधा दी जाएगी। इसके बाद उन्हें ‘ड्रॉप बैक’ यानी प्रसूता को केंद्र तक लाने और ले जाने की सुविधा दी जाएगी। पहले प्रसूता को यह सहूलियत जिला महिला अस्पताल के अलावा बहेड़ी, फरीदपुर और मीरगंज में दी जाती थी। इसके लिए सभी केंद्रों पर 24 घंटे के लिए वाहन 31 जुलाई तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह सुविधा पूरी तरह से निशुल्क होगी।
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एनआरएचएम की जननी सुरक्षा योजना में प्रसूता के स्वास्थ्य की खास देखभाल के लिए विशेष सुविधाएं दी गईं हैं। इसके तहत अस्पताल में भर्ती के दौरान उनके खानपान, इलाज, जांचें और फिर घर ले जाने की सुविधा को पूरी तरह निशुल्क है। यह सुविधा पहले भी थी, लेकिन संशोधित योजना के तहत इसे जिले की सभी 10 पीएचसी और छह सीएचसी में पहली अगस्त से लागू किया गया है। प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल ने सभी डीएम और सीएमओ को जारी निर्देश में कहा है कि जननी सुरक्षा योजना को प्राथमिकता के साथ संचालित कराया जाए। जहां पहले सामान्य प्रसव के बाद प्रसूता अस्पताल में 24 घंटे रुकती थी, वहीं अब उसे तीन दिन रुकने की व्यवस्था दी गई है। ऑपरेशन के बाद प्रसूता को सात दिन अस्पताल में रहने की सुविधा होगी।

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‘प्रमुख सचिव के निर्देशों को सभी सीएचसी-पीएचसी में भेज दिया गया है। पहली अगस्त से सब जगह प्रसूता के लिए विशेष व्यवस्था कर रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूता की खास देखभाल की जाएगी।’
डॉ. एसपीएस सिद्धू, नोडल अधिकारी एनआरएचएम
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बेहतर खानपान पर होगा जोर
प्रसूता के बेहतर खानपान का ध्यान रखा जाएगा। इसकी व्यवस्था किसी अच्छे रेस्टोरेंट से या किसी क्लब जैसे रोटरी, लायंस, इनरह्वील या महिला समाख्या को दी जाएगी। ब्लॉक स्तर पर अगर यह संभव नहीं होगा तो महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम इस कार्य को कराया जाएगा। इसमें भोजन की गुणवत्तापूर्ण, पौष्टिक और ताजी होंगी। खाने में डिब्बाबंद रिफाइंड आयल, एगमार्क मसाले और ताजी सब्जियों का इस्तेमाल होगा। लाभार्थी महिलाओं को आधा लीटर दूध, दो फल अथवा दो अंडे, दो समय का भोजन (दाल, चावल, रोटी, सब्जी, सलाद और रात में सब्जी रोटी या पराठा रोटी) दिया जाए। इसके लिए जांच के लिए अधिकारी रजिस्टर मेंटेन करेंगे। अगर कोई महिला दूध और अंडा न खाती हो तो उन्हें इतने ही मूल्य के चार-पांच फल दिए जाएं।

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