सेंट्रल जेल का कैदी क्षतिपूर्ति की राशि अदा न कर पाने के एवज में 12 साल से भुगत रहा सजा

Bareilly Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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अपनी सजा पूरे करने के बाद भी है जेल में
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आरटीआई में मिली उसके अपराध की जानकारी
दो गवाहों के कोर्ट में बयान के बाद ही होगा रिहा
बरेली। सेंट्रल जेेल में बंद कैदी डेनियल अपनी सजा और जुर्माने की सजा तो पूरी कर चुका है, लेकिन क्षतिपूर्ति की धनराशि न अदा कर पाने के एवज में 10 सालों से सजा भुगत रहा है। वह कई बार डीएम से मिलकर भी यह पूछ चुका है कि उसकी सजा पूरी हो गई है तो वह छोड़ा क्यों नहीं जा रहा। लेकिन, उस बात का इल्म नहीं है कि उसे प्रतिकर की धनराशि भी अदा करनी है। यह सारी जानकारी आरटीआई ऐक्टिविस्ट डॉ. प्रदीप के आरटीआई डालने के बाद मिली है।
आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु के पुडुकोटाई के रहने वाला सेंट्रल जेल का कैदी जे डेनियल 1994 से सेंट्रल जेल में बंद है। उस पर आईपीसी की धारा 420 के 11 मुकदमे हैं। हर मुकदमे में उसे तीन साल की जेल और साथ में जुर्माने की राशि भी लगाई गई थी। राशि अदा न करने पर कुछ माह और साल की और जेल काटनी पड़ी। अपनी ये सारी सजाएं डेनियल ने 2002 में ही पूरी कर ली। लेकिन, इसके बाद की उसे एक और सजा पूरी करनी बाकी थी वह है प्रतिकर की धनराशि। कुल 11 सालों के मुकदमों की प्रतिकर की धनराशि 96048 रुपये है। डॉ. प्रदीप ने बताया, 18 सालों से जेल में तमिलनाडु में रहने वाले कैदी के लिए इतने रुपये अदा करना बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में उसे दो ही वजह से छोड़ा जा सकता है एक कोई दो गवाह इतनी धनराशि अदा करने के बंधक पत्र पर हस्ताक्षर कर दें या फिर कोई खुद इस मामले में कोई दया बरते। हालांकि डॉ. प्रदीप ने इसके लिए हाई कोर्ट के वकील केके राय से अरजेंट अप्लीकेशन डाल रहे हैं। उम्मीद है है कि कोई उसकी दया याचिका पर कोई सुनवाई हो सके।
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कोर्ट के आदेश के बाद ही कुछ हो सकता है। इसमें जेल प्रशासन कुछ भी नहीं कर सकता। जितना सजा तय हुई है, उसे उतनी काटनी है।
- एके राय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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