सहासा में तनाव बरकरार, पीएसी तैनात

Bareilly Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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बिशारतगंज/आंवला। सहासा गांव में वाल्मीकि समाज के लोगों के शिव मंदिर में प्रवेश पर रोक लगाने से पैदा हुए विवाद को शांत करने के लिए तमाम अफसर वहां पहुंचे। दोनों पक्षों को बैठाकर सुलह कराने की कोशिश की गई। साथ ही अफसरों ने चेतावनी भी दी कि सार्वजनिक मंदिर में किसी के भी प्रवेश पर रोक लगाना कानून के खिलाफ है। इस तरह की कोशिश आगे की गई तो सख्ती से निपटा जाएगा। हालांकि, गांव में पहुंचे वाल्मीकि समाज के एक नेता की कार पर कुछ लोगों ने पत्थर भी मारा, लेकिन पुलिस ने फौरन ही स्थिति संभाल ली। गांव में तनाव के मद्देनजर पीएसी और पुलिस की गारद लगा दी गई है।
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सहासा गांव से देवचरा को जाने वाली सड़क के किनारे करीब बीस वर्ष पुराना शिव मंदिर है। बृहस्पतिवार को वाल्मीकि समाज के कुछ लोग शिव मंदिर पर पूजा करने के लिए गए थे। लेकिन, गांव के ही सवर्णों ने उन्हें मंदिर में घुसने से रोक दिया। इसका विरोध करते हुए शुक्रवार को बदलू वाल्मीकि ने थाने में तहरीर देकर दोषियो के विरूद्व कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि तहरीर दिए जाने की जानकारी मिलने पर दूसरे पक्ष के लोगों ने बदलू समेत वाल्मीकि समाज के सभी लोगों को मंदिर में दोबारा न आने की धमकी दी थी। इतना ही नहीं शनिवार को सवर्णों ने पंचायत करके वाल्मीकि समाज के लोगों को अपने टेंपो में न बैठाने का फैसला ले लिया। वाल्मीकियों का सहयोग करने वालों पर एक हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात भी तय की।
मीडिया में यह मामला उछलने पर इतवार की सुबह एसडीएम आंवला वंदिता श्रीवास्तव और सीओ जितेंद्र कुमार ने पूरे मामले की बिशारतगंज पुलिस से जानकारी ली। सुबह 11 बजे दोनों अफसर सहासा गांव पहुंच गए। उन्होंने मंदिर परिसर में दोनों पक्ष बुलाकर वार्ता शुरू की। सर्वणों का कहना था कि शिव मंदिर में वाल्मीकि समाज के लोग कभी पूजा करने नहीं आते थे। अब वे नई परंपरा डालने पर उतारू हैं। गांव में ही देवी मंदिर है, जहां वाल्मीकि सहित सभी जाति के लोग पूजा करने आते हैं। इस पर कभी किसी ने कोई एतराज नहीं किया।
दोनों अधिकारियों ने कहा कि कानून मंदिर में किसी के भी प्रवेश पर रोक की इजाजत नहीं देता। इस बात का सवर्ण जाति के कुछ लोगों ने विरोध किया और वे पंचायत से उठ गए। कुछ देर बाद अफसरों ने उन्हें समझा बुझाकर दुबारा बुला लिया। इसी बीच एसपी देहात भी वहां आ गए। उन्होंने दोनों पक्षों को बैठाकर कहा कि कानून से बढ़कर कोई नहीं है। मंदिर सार्वजनिक है, यदि पूजा करने आएंगे तो सब आएंगे, वरना कोई नहीं आएगा। अगर नहीं माने तो मंदिर को विवादित घोषित कर ताला डलवा दिया जाएगा। अधिकारियों के सख्त रवैये को देख विरोध कर रहे लोग शांत हो गए। बाद में दोनों पक्षों ने आगे से इस तरह की स्थिति पैदा न होने देने का वादा किया। एसपी देहात ने बताया कि शांति व्यवस्था के मद्देनजर गांव के मंदिर पर पुलिस गारद और वाल्मीकि बस्ती में डेढ़ सेक्शन पीएसी तैनात कर दी गई है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ करने वालों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। उधर, इतवार की दोपहर गांव में पहुंचे वाल्मीकि समाज के नेता कमल किशोर की कार पर कुछ लोगों ने पत्थर मार दिया। पुलिस के जवानों ने फौरन ही मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित गांव से बाहर तक पहुंचाया।
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