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बाजार में नहीं किताबें, कैसे हो पढ़ाई

Bareilly Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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बरेली। यूपी बोर्ड का विज्ञान वर्ग का 11वीं का सिलेबस इस बार बदल गया है, लेकिन इसकी जानकारी न तो बच्चों को है और न ही शिक्षकों को। सब बस इतना ही जानते हैं कि सिलेबस बदल गया है, लेकिन क्या बदला है, उन्हें यह नहीं पता है।
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मैथ्स से पढ़ाई करने वाले शिखर सक्सेना ने बताया, मैथ्स की कोचिंग पढ़ना चाहते हैं, लेकिन किताबें ही नहीं मिल रही हैं, इसलिए पता ही नहीं चल पा रहा है कि कोर्स में इस बार क्या है और क्या नहीं। हमारे टीचर के पास भी किताब नहीं हैं और उन्हें पता भी नहीं है जो वो मुझे बताएंगे। इसलिए, अब पढ़ाई कैसे करें। बायो ग्रुप से पढ़ाई करने वाली सरिता शर्मा का कहना है, जुलॉजी और बॉटनी की किताबें भी नहीं मिल रही हैं। रोज बाजार जाते हैं और वापस लौट आते हैं। मुझे बायोलॉजी बहुत पसंद है। इसलिए, मैं उसे पहले से ही पढ़ना चाहती थी, लेकिन किताबें ही नहीं मिल रही हैं। ऐसी समस्या सौरभ श्रीवास्तव को भी हो रही है। उन्हें भी कोई किताब नहीं मिल रही है। बोले, समझ में नहीं आ रहा है। पढ़ाई कैसे करें। एक तो विज्ञान वर्ग ले लिया है, दूसरे किताब ही बाजार में नहीं है, जो पढ़ाई करें। इससे तो पढ़ाई बहुत प्रभावित हो रही है।

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11वीं की कोई किताब नहीं आई
11वीं के नए सिलेबस की अभी कोई किताब नहीं आई है। बच्चे आते हैं और लौट जाते हैं। जुलाई में तो दुकान से उठना मुश्किल होता था, लेकिन अब है कि दुकान खाली पड़ी है, जब किताबें ही नहीं हैं तो बच्चे खरीदें क्या। प्रकाशक आठ-आठ दिन कहकर पूरी जुलाई ऐेसे ही निकाल दे रहे हैं।
प्रदीप कुमार, पुस्तक विक्रेता, गोयल बुक डिपो
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शिक्षक भी परेशान.......

...बस सुन रहे हैं कि सिलेबस बदल गया
अब तक प्रकाशकों ने स्पेसीमेन कॉपी ही नहीं दी है। इसलिए, पता ही नहीं चल पा रहा है कि सिलेबस में क्या बदलाव किया गया है। हम भी सुन ही रहे हैं कि सिलेबस बदला गया है, लेकिन क्या बदला गया है, यह नहीं पता है। पढ़ने वाले बच्चे पूछने आते हैं, लेकिन क्योंकि क्या बताया जाए।
सुभाष कुमार, मैथ्स प्रवक्ता, जीआईसी
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जून में ही लग जाता था किताबों का ढेर
जून में ही प्रकाशक किताबें का ढेर लगा देते थे। लेकिन अब आधी जुलाई निकल गई है, लेकिन कोई किताब नहीं। सिलेबस बदला है, इस पर भी कोई जानकारी नहीं दी गई। एक तो पहले ही शासन की ओर से सिलेबस बदलने का कोई निर्देश नहीं आता, दूसरे किताबें भी समय से नहीं मिल रहीं। ऐसे में क्या होगा, बच्चे पूछते हैं और हम चुप रहते हैं।
बीआर शर्मा, बायोलॉजी प्रवक्ता, जीआईसी
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