दिन में तीन बार बदलता है शिवलिंग का रंग

Bareilly Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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बरेली। नाथ नगरी के मंदिरों में श्री वनखंडीनाथ मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के लिहाज से बेहद खास है। कहा जाता हैै कि महाभारत कालीन इस मंदिर में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने द्रोपदी के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े से जुड़े इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की खासियत है कि वह दिन में तीन बार रंग बदलता है।
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श्री वनखंडी नाथ मंदिर जिस स्थान पर है वहां पहले घना जंगल था। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान जब पांडव, द्रोपदी के साथ इधर से गुजरे तो उन्होंने जंगल में शिवलिंग के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद ही लोगों को वन में शिवलिंग स्थापित होने की जानकारी हुई। तब वहां मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के बारे में यह किवदंती भी प्रचलित है कि एक बार एक राजा ने अपने दीवान को शिवलिंग लेने भेजा। उसने मजदूरों और फिर हाथियों की मदद से शिवलिंग को हटाना चाहा लेकिन शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ। थक हारकर दीवान लौट गया। सावन में मंदिर में दिन-रात श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है।
श्री वनखंडीनाथ धाम में भगवान शिव साक्षात विराजमान हैं। श्रद्घालुगण शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ कमाते हैं। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े से जुडे़ इस मंदिर का अलग ही धार्मिक महत्व है।- महंत हरिगिरी जी महाराज
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