मां ने सीएमएस दफ्तर में हंगामा किया

Bareilly Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
बरेली। डॉक्टर को घूस दी, महीना भर से ज्यादा वक्त तक अस्पताल में पड़े रहे मगर टूटे कूल्हे का ऑपरेशन नहीं हुआ। सिर्फ यही नहीं, डॉक्टर ने इस युवक के लिए दवाओं का पर्चा भी लिखा तो बाहर से खरीदकर लाने के लिए। रोज कमाकर घर चलाने वाले बेटे की यह दुर्दशा जब बर्दाश्त से बाहर हो गई तो बृहस्पतिवार को उसकी मां ने सीएमएस के ऑफिस में जाकर हंगामा खड़ा कर दिया। सीएमएस ने डॉक्टर को बुलाकर हड़काया तो उसने घूस खाने के इल्जाम से मुकरते न बना। इसके बाद उसने आधी रकम तो महिला को लौटा दी। बाकी रकम की बाबत बताया कि वह दलाल खा गया। सीएमएस ने इसके बाद बाहर से दवाएं लिखने पर डॉक्टर का स्पष्टीकरण मांगा है।
छत से गिर जाने की वजह से नेकपुर में रहने वाले राजेश कुमार के दायें कूल्हे की हड्डी टूट गई थी और वह चलने फिरने में असमर्थ हो गए। उनकी मां लक्ष्मी ने चार जून को उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। लक्ष्मी के मुताबिक पहले ही दिन एक शख्स ने उनसे संपर्क किया। उनसे कहा कि अगर वह डॉक्टर को साढ़े आठ हजार रुपये की घूस दे देंगी तो जल्द राजेश के कूल्हे की इम्प्लांट सर्जरी करा दी जाएगी। लक्ष्मी ने उसे साढ़े आठ हजार रुपये दे दिए। इसके बाद उस दलाल ने उनकी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. टीएस आर्या से बातचीत करा दी। इसके बाद धीरे-धीरे एक महीना बीत गया, लेकिन न राजेश की इम्प्लांट सर्जरी हुई, न डॉक्टर ने यह बताया कि वह उनकी सर्जरी कब करेगा। इस बीच डॉ. टीएस आर्या राजेश के लिए दवाएं भी बाहर की लिखते रहे।
कूल्हा न बदलने की वजह से राजेश का दर्द बढ़ता गया। लक्ष्मी से जब उनकी हालत देखी नहीं गई तो वह बृहस्पतिवार को सीएमएस दफ्तर पहुंच गईं। पहले तो उन्होंने सीएमएस डॉ. सुधांशु कुमार को सारा मामला बताया और उसके बाद फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने बताया कि उनके घर में उनका बेटा ही कमाने वाला है जो महीने भर से अपंग होकर अस्पताल में पड़ा है। सीएमएस ने इस पर लक्ष्मी से दलाल का फोन नंबर लेकर उसे फोन किया। पहले तो वह एेंठा। बाद में पता लगा कि वह सीएमएस से बात कर रहा है तो उसने फोन काट दिया। इसके डॉ. सुधांशु कुमार ने डॉ. टीएस आर्या को अपने दफ्तर में बुलाकर जमकर हड़काया। डॉ. आर्या ने इस पर घूस लेने की बात कबूल कर ली। उन्होंने यह भी बताया कि जिला अस्पताल में इम्प्लांट सर्जरी के उपकरण ही उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वह राजेश का ऑपरेशन नहीं कर पा रहे हैं। सीएमएस ने पूछा कि उन्होंने राजेश को भर्ती क्यों रखा है तो उन्हें जवाब देते न बना। सीएमएस के कहने पर डॉ. आर्या ने लक्ष्मी को उनके दफ्तर में ही चार हजार रुपये लौटा दिए। सीएमएस ने इस मामले में डॉ. आर्या को तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा है।


‘डॉक्टर टीएस आर्या ने राजेश की इम्प्लांट सर्जरी करने के लिए साढ़े आठ हजार रुपये लिए थे, जिसमें से चार हजार संजय नाम के दलाल ने लिए हैं। डॉ. आर्या से चार हजार रुपये वापस करा दिए गए हैं, लेकिन दलाल का पता नहीं चल पाया है। शासन की सख्त मनाही के बाद भी बाहर से दवा लिखने और उपकरण लाने के लिए कहने पर हमने डॉ. आर्या से तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण भी देने को कहा है। राजेश का यथासंभव बेहतर इलाज किया जाएगा।’ - डॉ. सुधांशु कुमार, सीएमएस

जिला अस्पताल में दलालों की तादाद बढ़ी
जिला अस्पताल में यूं दलालों के मरीजों को ठगने की शिकायतें काफी पुरानी हैं, लेकिन इधर कुछ समय से यह सिलसिला बढ़ गया है। बताया जाता है कि किसी भी वार्ड में किसी मरीज के भर्ती होने के बाद डॉक्टर से पहले दलाल ही उससे संपर्क करते हैं और बेहतर इलाज का झांसा देकर उससे रकम ऐंठने की कोशिश करते हैं। मरीजों का तो यहां तक कहना है कि अगर घूस देने से इनकार किया जाए तो दलाल उन्हें धमकाने तक से बाज नहीं आते। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से अक्सर इस बारे में शिकायतें होती हैं, लेकिन दलालों की घुसपैठ बंद नहीं हो पा रही है।

दिक्कतों से जूझ रहा है राजेश का परिवार
राजेश इलेक्ट्रीशियन हैं। परिवार का भरण-पोषण उन्हीं की रोजाना की कमाई से होता था। राजेश की मां लक्ष्मी के मुताबिक उनका परिवार नेकपुर में किराये के घर में रहता है। उनके पति कुबेर सिंह और छोटा बेटा संतोष रुद्रपुर में रहकर मेहनत-मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि महीने भर से राजेश के अस्पताल में पड़े होने की वजह से उनके परिवार को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मकान का किराया देने तक में उन्हें मुश्किल हो रही है। इससे भी ज्यादा उन्हें यह आशंका परेशान कर रही है कि अगर उनका बेटा ठीक नहीं हुआ तो उनका परिवार कैसे चल पाएगा।

इनसेट में
मेल ऑर्थोपैडिक वार्ड में घूसखोरी के किस्से आम
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. केवी पाठक पर चार मई को गुलाबनगर में रहने वाले फारूख ने चार हजार रुपये की घूस लेने का आरोप लगाया था। फारूख अपने पैर की हड्डी टूटने की वजह से जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। सीएमएस ने उनके आरोपों की जांच कराई तो मामला सही पाया गया। इसके बाद सीएमएस ने डॉक्टर केवी पाठक को हड्डी रोग विभाग से हटा दिया था। मेल ऑर्थोपैडिक वार्ड में भर्ती एक मरीज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे भी इलाज करने के लिए छह हजार रुपये लिए गए हैं। उनका बायां बाजू टूटा हुआ है, जिस पर डॉक्टर ने घूस लेने के बाद ही प्लास्टर चढ़ाया था। उन्होंने बताया कि यहां मरीजों को कभी महीने भर और कभी दो-दो महीने तक भर्ती रखा जाता है। फिर भी उनके इलाज में डॉक्टर दिलचस्पी नहीं लेते।

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