पूरब की हवाओं से जगी बारिश की उम्मीद

Bareilly Updated Mon, 02 Jul 2012 12:00 PM IST
तीन-चार दिन में बरेली पहुंच सकता है मानसून

बरेली। पारा नीचेे गिरने का नाम नहीं ले रहा और उमस है कि बेहाल किए जा रही है। रविवार को तो उमस ने रिकॉर्ड ही तोड़ दिया। हालांकि मौसम विज्ञानियों की निगाह में लगातार बढ़ रही उमस शुभ संकेत है। यह इस बात का इत्मीनान दिला रही है कि मानसून अब ज्यादा दूर नहीं है।
रविवार को हवा में 73 प्रतिशत नमी थी। इसके अलावा अधिकतम तापमान 41 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री रिकार्ड किया गया। इसी के चलते उमस ने इतना बुरा हाल किया कि लोगों के लिए दिन काटना मुश्किल हो गया। शहर के ज्यादातर इलाकों में बिजली की अंधाधुंध कटौती ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अब तक पछुआ हवाएं चल रही थीं। इसी वजह से बारिश की संभावना नहीं बन पा रही थी। लेकिन अब पूरब से आने वाली हवाओं से संकेत मिल रहा है कि तीन-चार दिन में बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञानी एचएस कुशवाहा ने बताया कि पुरवाई चलने से उमस बढ़ गई है, लेकिन यह अच्छा संकेत हैं। वातावरण में नमी का स्तर बढ़ रहा है, जिससे बारिश की उम्मीद बढ़ी है। मानसून तीन-चार दिन में दिल्ली से होता हुआ बरेली आ जाएगा। इससे पहले पछुआ हवाओं की वजह से बंगाल की खाड़ी से चला मानसून अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम की ओर घूम गया था।

फसलों पर भी मौसम की मार
तीन जुलाई को आषाढ़ खत्म होेने के साथ ही सावन शुरू होने जा रहा है, लेकिन बारिश का नामोनिशान नहीं है। ऐसे में किसानों के चेहरे पर भी मायूसी है। लगभग सभी फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खरीफ की फसल सब से ज्यादा प्रभावित होने की उम्मीद है। बारिश न होने से बुवाई प्रभावित होगी। 25 से 30 जून के बीच ज्वार, बाजरा, अरहर, तिली, उड़द और मूंग की बुवाई की जाती है। इसके अलावा धान की रोपाई भी 20 जून से शुरू हो जानी चाहिए थी। किसान हरि प्रसाद का कहना है, हर रोज बादलों को देखते है लेकिन बारिश का नामोनिशान नहीं है। धान की रोपाई के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं। यही हाल रहा तो खेती चौपट हो जाएगी।
दलहन को होगा खासा नुकसान
बारिश न होने की वजह से धान के अलावा दलहनी फसलों को खासा नुकसान होगा। पानी की कमी के चलते उत्पादन तो गिरेगा साथ ही कई तरह की बीमारियां भी लगेंगी। इसके अलावा पशुओं का चारा भी जहरीला हो जाएगा।

आम और जामुन पर संकट
मानसून की देरी से आम और जामुन की फसल भी प्रभावित होती दिख रही है। यही हाल रहा तो जामुन की फसल चौपट हो जाएगी। बारिश के बाद ही जामुन में गूदा बढ़ता है और वह पकना शुरू होती है। इसी प्रकार आम पर भी यह तल्ख मौसम असर छोड़ रहा है। कार्बेट की मदद से आम को पका तो लिया जा रहा है लेकिन यह सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। इसमें वह मिठास भी नहीं मिलेगी जिसके लिए फलों के राजा आम को जाना जाता है। कार्बेट से पकाये गए फल अधिक गर्मी के चलते सड़ सड़ भी रहे हैं। इससे इनके प्वॉइजनस होने का भी खतरा है। इसे खाने पर बीमारियां होने की संभावना बढ़ रही है।

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