छात्रसंघ चुनाव में भी दिखेगा राजनीतिक दलों का असर

Bareilly Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
प्रदेश स्तर पर तय होंगे प्रत्याशी
लिंगदोह कमेटी की रोक के बाद भी कैंपस में राजनीतिक दलों की दखल

बरेली। तमाम कोशिशों के बाद भी छात्रसंघ चुनाव में राजनीतिक दलों की पैठ कम होते नहीं दिख रही है। कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर लगभग सभी राजनीतिक दलों की इकाइयां काम कर रही हैं। जो परिसर के चुनावी माहौल कोे पार्टीगत रंग देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी। इसके आसार अभी से दिखने लगे हैं। छात्र राजनीति कर रहे विद्यार्थी भी इसे लेकर आशंकित हैं। उनका कहना है कि सपा और कांग्रेस सरीखे दलों के अनुसांगिक संगठन मसलन समाजवादी छात्र सभा और एनएसयूआई के कार्यकर्ता कैंपस में सक्रिय हैं। जो पूरी तरह से पार्टी की गाइड लाइन पर काम करते हैं। इतना ही नहीं इन संगठनों से वही प्रत्याशी बनाये जाएंगे जो पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन जुटाने में सफल होंगे, चाहे वह साल भर विद्यार्थियों के बीच रहे हों या न रहे हों।
लिंगदोह कमेटी के आधार पर छात्रसंघ चुनाव की अनुमति मिलने के बाद बरेली कॉलेज में चुनाव की गहमागहमी शुरू हो गई है। इसे लेकर विद्यार्थी भी उत्साहित हैं। छात्र राजनीति करने वाले विद्यार्थी अपने लिये कैंपस में समर्थन जुटाने में लगे हैं। समाजवादी छात्र सभा के अंकित यादव का कहना है, इस बार सछास की ओर से मंत्री भगवत सरन गंगवार के रिश्तेदार को टिकट देने की उम्मीद ज्यादा दिख रही है। हालांकि प्रबल दावेदारों में शिव प्रताप, विशाल यादव, अंकित यादव और वैभव गंगवार का नाम शामिल है। वैभव गंगवार को टिकट देने की बात इसलिए उठ रही है, क्योंकि कुर्मी विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है। विश्वविद्यालय के संदर्भ में बात की जाए तो समाजवादी छात्र सभा से अरविंद पटेल, आलोक यादव और सुमन प्रकाश का नाम चर्चा में है। शिव प्रताप का कहना है, सछास से प्रदेश स्तर से नाम तय होकर आएंगे और वहां पर किसी की नहीं चलेगी। यही हाल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई सरीखे संगठनों का है। इन संगठनों के लिए काम कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि प्रदेश स्तर से जो भी नाम आएगा, उस पर सभी की सहमति होगी।

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