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रिश्वत लेते वन रक्षक गिरफ्तार

Bareilly Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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बरेली। विजिलेंस टीम ने बृहस्पतिवार की दोपहर एक वन रक्षक को घूस लेते गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई देवचरा के एक ट्रांसपोर्टर की शिकायत पर हुई। इस संबंध में डीएम और एसपी विजिलेंस से शिकायत की गई थी। थाना सुभाष नगर में वन रक्षक के खिलाफ मुकदमा कायम कर लिया गया है।
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14 जून की रात देवचरा निवासी गौरव गुप्ता के दो ट्रक हल्द्वानी से लौट रहे थे। ट्रांसपोर्टर गौरव गुप्ता के मुताबिक यूपी-उत्तराखंड की सीमा पर वन विभाग के कर्मचारियों ने ट्रांजिट शुल्क की रसीद काटने के बजाय रिश्वत में तेरह सौ रुपये लेकर दोनों ट्रक निकाल दिए। इसके बाद भोजीपुरा इलाके में वन विभाग का उड़नदस्ता मिल गया। उसमें डिप्टी रेंजर अखिलेश शर्मा, दिनेश शर्मा, संजीव चौधरी और वन रक्षक चिंतामणी शर्मा शामिल थे। उड़नदस्ते ने दोनों ट्रक भोजीपुरा थाने में खड़े करा दिए। वन रक्षक ने दोनों ट्रक छोड़ने के बदले बतौर ट्रांजिट शुल्क 50-50 हजार रुपये मांगे। यह भी कहा कि यदि दस हजार रुपये उन्हें दे दिये जाएं तो ट्रांजिट शुल्क कम कर दिया जाएगा।
बुधवार को गौरव गुप्ता और उनके भाई हरिओम गुप्ता ने डीएम मनीष चौहान और विजिलेंस के एसपी राकेश जौली से मिलकर पूरा वाकया बताया। डीएम ने मनोरंजन कर अधिकारी श्रीप्रकाश और उपनिदेशक बचत जगदीश सिंह को गवाह बनाया और एसपी विजिलेंस ने इंस्पेक्टर डीके बालियान, ओमकार सागर और केके सिंह की टीम गठित कर दी। प्रेस कांफ्रेंस में एसपी विजिलेंस जौली ने बताया कि योजना के मुताबिक गौरव ने बृहस्पतिवार की सुबह वन रक्षक चिंतामणी को फोन किया। उनके बीच ट्रांजिट शुल्क कम करने के बदले दस हजार रुपये देने की बात तय हुई। वायदे के मुताबिक दोपहर करीब एक बजे गौरव और उनके भाई आंवला बस स्टैंड पहुंच गए। उनसे कुछ दूरी पर ही विजिलेंस की टीम थी। करीब सवा बजे वन रक्षक चिंतामणी शर्मा सेंट्रो कार से पहुंचे। तीनों लोगों ने हाथ मिलाने के बाद एक दुकान के पास खड़े होकर सिगरेट पी। उसके बाद ट्रांसपोर्टर गौरव ने दस हजार रुपये उन्हें दिए। वन रक्षक चिंतामणी के हाथ में रुपये पहुंचते ही विजिलेंस टीम ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद चिंतामणी को सुभाष नगर थाने ले जाया गया। कार भी कब्जे में ले ली गई। इंस्पेक्टर डीके बालियान की तरफ से मुकदमा कायम कर लिया गया है।
परेशान होकर उठाया कदम
ट्रांसपोर्टर हरिओम गुप्ता के मुताबिक रिश्वतखोरी से वह परेशान हो चुके थे। यूपी-उत्तराखंड सीमा पर बगैर रिश्वत दिए गाड़ी नहीं निकलने दी जाती। रास्ते में वन विभाग के उड़नदस्ते लगे रहते हैं। गाड़ियां पकड़ने के बाद वह वन विभाग के आला अफसरों से मिले थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। सभी जगह भटकने के बाद वह डीएम और एसपी विजिलेंस के पास गए।

माफियाओं के दबाव में हुई गिरफ्तारी
वन रक्षक संघ ने गिरफ्तारी की निंदा की है। कहा है कि यह कार्रवाई माफियाओं के दबाव में की गई है। यदि 22 जून तक गिरफ्तार किये गए चिंतामणि को छोड़ा नहीं गया तो बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत के सभी वनकर्मी प्रदर्शन करेंगे।
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