आईस कैंडी के दो नमूनेे फेल, मुकदमा दर्ज कराया

Bareilly Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
केस: 1, कोहाड़ापीर की क्लासिक फूड आईसक्रीम फैक्ट्री से 28 अप्रैल को एक नमूना लिया गया था। लखनऊ की लैब की जांच में यह नमूना फेल हो गया। रिपोर्ट में आईस कैंडी में मिलाए गया दूध, चीनी, स्किम्ड मिल्क पाउडर और पानी सभी खराब क्वालिटी का मिला।
केस: 2, फतेहगंज पश्चिमी की मीनू आईस कैंडी फैक्ट्री से एक नमूना डीआई नवेंदु गंगवार ने 25 मई को लिया था। आईस कैंडी में चीनी, पानी और स्किम्ड मिल्क पाउडर और खाद्य रंग सब स्टैंडर्ड पाए गए। फैक्ट्री के खिलाफ एफएसडीए ने एडीएम सिटी कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है।
-------------------------------------

फ्लैग ...


बरेली। आईस कैंडी के नमूने फेल होने की यह तो केवल बानगी भर है। हर इलाके में सेहत के लिए बेहद खतरनाक ‘मीठा जहर’ बिक रहा है। लेकिन, जिस खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के पास इसे बिकने से रोकने की जिम्मेदारी है, उसके अफसर खुद को केवल नमूने लेने तक ही सीमित रख रहे हैं। नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग भी सब कुछ जानते हुए बेखबर बना हुआ है। जागरूकता की कमी और अफसरों की उदासीनता का खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।
खराब दूध, पानी, अखाद्य बर्फ और प्रतिबंधित सैक्रीन को मिलाकर बनाई जा रही आईस कैंडी बड़े पैमाने पर बेची जा रही हैं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इन्हें खा रहे हैं। लेकिन, लखनऊ की लैब की रिपोर्ट बताती है कि ये शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ही बीमारियां भी दे रही हैं। इनसे पेट की बीमारियां, डायरिया और हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अफसर कुछेक कैंडी के नमूने भरकर अपनी ड्यूटी पूरी मान रहे हैं, लेकिन इससे असल समस्या जस की तस बनी हुई है। इतना ही नहीं गर्मी आते ही बर्फ का इस्तेमाल बढ़ जाता है। गन्ने का जूस, मैंगो शेक, फ्रूट शेक और अन्य तमाम पेय पदार्थों में भी अखाद्य बर्फ मिलाया जाता है। कोल्ड स्टोरेज से बिकने वाले इस बर्फ का इस्तेमाल सिर्फ कूलिंग के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन न सिर्फ ठेलों पर, बल्कि बड़ी दुकानों पर भी इसे खाने के लिए दिया जा रहा है। चीफ फूड सेफ्टी ऑफिसर सुनील कुमार कहते हैं कि हम कोल्ड स्टोरेज वालों से बर्फ को खाने के लिए बेचने से मना करते हैं, मगर वे नहीं मानते। खरीदने वालों को भी सोचना चाहिए कि यह बर्फ लस्सी आदि में डालकर पीने लायक नहीं है।


--------------------
इन जगहों पर बिकता है ‘मीठा जहर’
कटरा चांद खां, सैलानी, चौपुला चौराहा, मलूकपुर, कोहाड़ापीर, धर्मकांटा, ईंट पजाया चौराहा, डेलापीर चौराहा, जोगीनवादा, सतीपुर, जगतपुर चौराहा, जंक्शन, बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास, कुतुबखाना चौराहा, मालियों की पुलिया, नॉवल्टी चौराहा, सेटेलाइट आदि में बर्फ और बर्फ से बनी कैंडी और गोले बेचे जाते हैं।
केवल नमूने भरने से नहीं रुकेगी मिलावट
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के अनुसार कारोबारियों को मिलावट करने से रोकने के लिए सख्त कदम तो उठाने ही होंगे, अनपढ़ ठेलों वालों को भी खाद्य एवं अखाद्य रंगों में अंतर और इससे होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना होगा। उन्हें साफ सफाई के प्रति जागरूक किए जाने की भी जरूरत है। समय-समय पर उनकी खाद्य सामग्री की जांच भी होनी चाहिए, लेकिन एफएसडीए की टीम साल में दो चार बार केवल नमूने भरने का काम ही कर रही है।

आईस कैंडी को डॉक्टर मानते हैं खतरनाक
सीनियर फिजिशियन डॉ. शरद अग्रवाल ने बताया कि आईस कैंडी बनाने में गंदे पानी से खुले में जमाई गई बर्फ बेहद नुकसान देय है, इसमें हेपेटाइटिस, डायरिया और टाइफाइड के कीटाणु होते हैं। नतीजतन इन बीमारियों के होने का खतरा हमेशा बना रहता है। अखाद्य और घटिया रंग मिलाने से बोन मैरो, गुर्दा और लीवर को नुकसान हो सकता है। आईस कैंडी में खराब और सिंथेटिक दूध मिलाने से पेट और लीवर को नुकसान पहुंचता है। सैक्रीन का लगातार सेवन डायबिटीज का रोगी बना सकता है। धूप और गर्मी से आने के बाद एकाएक आइस कैंडी खाने पर शरीर का तापमान गिर जाता है। इससे शरीर के अंदर मौजूद कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं। इससे टांसिल्स, गले का संक्रमण और खांसी, जुकाम के साथ ही निमोनिया की शिकायत भी हो सकती है।

एफएसडीए कारोबारियों को जागरूक करेगा
चीफ फूड सेफ्टी ऑफिसर सुनील कुमार ने बताया कि मिलावट रोकने के लिए हम बड़े-छोटे प्रतिष्ठानों से नमूने भर रहे हैं। नमूने जांच के लिए लखनऊ की लैब में भेजे जा रहे हैं। मई में हमने 45 नमूने भरे थे और जून में अब तक कोक, पेप्सी और वाडीलाल आइसक्रीम जैसे बड़े प्रतिष्ठानों के नमूने भरे हैं। साथ ही कारोबारियों को जागरूक भी किया जा रहा है। उन्हें मिलावट को रोकने के उपाय बताते हैं। शहर में जो भी कोल्ड स्टोरेज हैं, वहां भी हम बर्फ की जांच करने जाते हैं तो स्टोरेज वालों का जवाब होता है कि वह तो केवल कूलिंग के लिए बेच रहे हैं, खाने के लिए नहीं। छोटे-छोटे ठेलों को कभी कभार ही चेक करते हैं, लेकिन इन्हें भी जागरूक करने का काम शुरू करेंगे।

आईस कैंडी फैक्ट्री के लाइसेंस देने के नियम और शर्तें
- खाद्य पदार्थ बनाने का स्थान साफ-सुथरा होना चाहिए।
- खाद्य सामग्री बनाने वाले कर्मचारियों के नाखून बढ़े नहीं हों और बनाते समय एप्रैन पहने।
- खांसी और किसी प्रकार के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति को काम में नहीं लगाना चाहिए। हर छह महीने पर काम करने वालों के स्वास्थ्य की जांच हो।
- गुटका, बीड़ी, सिगरेट और पान तंबाकू का इस्तेमाल खाद्य पदार्थ बनने वाले कक्ष में नहीं होना चाहिए।
- फूड आइटम रखने की जगह का तापमान नियत हो और कमरा हवादार होना जरूरी है।
- खाद्य सामग्री बनने वाले कक्ष के पास टायलेट नहीं होना चाहिए।
- आईस कैंडी में सैक्रीन का इस्तेमाल प्रतिबंधित होने के नियम का पालन होना चाहिए

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Kullu

मई माह बारिश,आंधी-तूफान से 3.84 करोड़ की चपत

मई माह बारिश,आंधी-तूफान से 3.84 करोड़ की चपत

21 मई 2018

Related Videos

VIDEO: जा रहे थे मां पूर्णागिरी के दर्शन के लिए लेकिन रास्ते में खड़ी थी मौत

मां पूर्णागिरी के दर्शन को जा रहे श्रद्धालुओं के जत्थे को एक डंपर ने कुचल दिया। ये सभी लोग बरेली के थे। हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई। सीएम योगी ने घटना पर गहरा दुख जताया है।

18 मई 2018

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen