जोश और जज्बे की पाठशाला

Bareilly Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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सैन्य अधिकारी बनने को महिला कैडेट्स ने लिया प्रशिक्षण
8 यूपी गर्ल्स बटालियन में कर्नल एस मुखर्जी ने चलाई स्पेशल क्लास
नीरज
बरेली। यह जोश और जज्बे की पाठशाला है, जो महिलाओं को भारतीय सेना में अफसर बनने के लिए प्रेरित करती है। आठवीं यूपी गर्ल्स बटालियन में कई सालों से पांच दिन की यह स्पेशल क्लास चलाई जाती है। इसमें हिस्सा लेने वाली एनसीसी कैडेट्स को न सिर्फ डिफेंस की तकनीकी जानकारी दी जाती है बल्कि मोर्चे पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने का हुनर भी सिखाया जाता है।
बृहस्पतिवार को समापन से पहले इस स्पेशल क्लास में इस बार लगभग एक दर्जन कैडेट्स ने प्रशिक्षण लिया। बटालियन के कमांडिंग आफिसर कर्नल नंद किशोर ने थल सेना की विभिन्न शाखाओं में भर्ती होने के लिए कैडेट्स को जरूरी जानकारी दी। परीक्षाओं के दौरान किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, इस पर भी चर्चा हुई। स्पेशल क्लास में मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका अदा करने वाले कर्नल एस मुखर्जी बताते हैं कि कमीशंड आफिसर बनने के लिए एनसीसी कैडेट्स को पांच दिनों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है। साक्षात्कार के दौरान क्रमश: स्क्रीनिंग टेस्ट, फिजियोलॉजिकल टेस्ट, जीटीओ टेस्ट, लेक्चरेट, ग्रुप टास्क, कमांड टास्क और कॉन्फ्रेसिंग कराई जाती है। यह प्रशिक्षण नेशनल डिफेंस एकेडमी, आर्मी एजुकेशन कोर, एनसीसी स्पेशल इंट्री स्कीम, वूमेंस डायरेक्ट इंट्री, आफिसर ट्रेनिंग एकेडमी और शार्ट सर्विस कमीशन के लिए जरूरी है।
बरेली एनसीसी ग्रुप के कमांडर ब्रिगेडियर राजीव पंत ने बताया कि स्पेशल क्लास का मकसद ज्यादा से ज्यादा गर्ल्स कैडेट को कंधे पर स्टार लगाने का मौका देने का है। डिप्टी ग्रुप कमांडर मलुक सिंह ने भी गर्ल्स कैडेट्स को प्रेरित किया। कर्नल नंद किशोर ने बताया कि तीन साल से लगातार आठवीं यूपी गर्ल्स बटालियन सेना को महिला अधिकारी दे रही है। यह हम सबके लिए गौरव की बात है। कार्यशाला के समापन पर एडम आफिसर कैप्टन कृष्णा दुबे ने एनसीसी की ओर से क्लास चलाने के लिए कर्नल एस मुखर्जी का आभार व्यक्त किया।

कई कैडेट्स को मिला अफसर बनने का मौका

स्पेशल क्लास में प्रशिक्षण लेने वाली कई कैडेट्स को सेना में अफसर बनने का मौका मिला है। याशिका हटवाल, गीता राना, अनिशा हटवाल, गीता मिश्रा, कविता पाठक, नम्रता सिंह, राशि शर्मा, प्रिया ठाकुर आदि शामिल हैं।

नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ
एनसीसी ने भीड़ से अलग कर हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता पैदा की। अब हम भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय उसका नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं। एक आम लड़की से हम बिल्कुल अलग हैं।
मोनिका शर्मा, प्रेमनगर

सेना में अफसर बनूंगी
परिवार की ओर से हमें प्रोत्साहन मिलता है। सेना में अधिकारी बनने के लिए मैंने दिन-रात मेहनत की है। अपनी पहचान बनाने के लिए अधिकारी बनकर कंधे पर स्टार जरूर लगाऊंगी।
श्रद्धा सक्सेना, गुद्दड् बाग

देश सेवा ही मेरा लक्ष्य
पारिवारिक बंधन देश सेवा करने से नहीं रोक सकते। मैं शादी उसी से करूंगी जो भावनाओं को समझे और आर्मी में नौकरी करने से मना न करे। हम सामाजिक दायित्व को बखूबी निभाएंगे।
अंशू सिंह, इफ्को कॉलोनी

एनसीसी ने आत्मविश्वास जगाया
एनसीसी ने हमारी लाइफ स्टाइल चेंज कर दी। मेरे अंदर आत्मविश्वास जागा है। पूरी मेहनत से पढ़ाई करके सेना में कमीशन आफिसर जरूर बनूंगी। यह मेरे जीवन का सपना है।
सुगंधा बिसारिया, सुभाषनगर
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