चेतन भगत, अगाथा क्रिस्टी, शिव खेड़ा पहली पसंद

Bareilly Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
कॉमिक्स, बोध कथाएं और चंपक जैसी कहानियों की किताबें हुईं गुम

बच्चे अंग्रेजी अच्छी करने के लिए पढ़ रहे किताबें

बरेली। चेतन भगत, आगाथा क्रिस्ट्री और शिव खेड़ा बच्चों की पहली पसंद हैं। जो बच्चे इन किताबों को नहीं पढ़ते वे एपीजे अब्दुल कलाम की किताब खरीदते हैं। खास बात यह है कि ये सारी किताबें अंग्रेजी वर्जन की ही पढ़ी जातीं हैं। इनको पढ़ने की वजह कोई प्रेरणा नहीं बल्कि अंग्रेजी के प्रवाह को बढ़ाना है। तमाम बच्चे इन किताबों को ही पढ़कर ही गर्मी की छुट्टियां बिता रहे हैं।
केंद्रीय विद्यालय में कक्षा दस में पढ़ने वाले एकांश सक्सेना ने चेतन भगत के कई उपन्यास खरीदें हैं। उन्होंने बताया, एक तो उनके उपन्यास को पढ़ना बड़ा दिलचस्प होता है, दूसरे अंग्रेजी का प्रवाह भी अच्छा हो जाता है। इसमें नए शब्द के साथ ही लेखन शैली भी सीखने को मिली है। बिशप कोनरॉड में कक्षा नौ के शिखर शर्मा ने अगाथा क्रिस्टी की किताबें खरीदी हैं, क्योंकि उन्हें डिडेक्टिव स्टोरीज़ पसंद हैं। उन्होंने पिछले साल जेके रोलिंग का हेरी-पॉटर पढ़ा था। बीबीएल स्कूल में 11वीं में पढ़ने वाले सिद्धार्थ ने शिव खेड़ी की मोटिवेटिव किताबें खरीदी हैं। उन्होंने बताया कि वह मार्केटिंग में कॅरिअर बनाना चाहते हैं। इस लिए इन किताबों से बहुत सारी जानकारी मिल जाती है।
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कलाम को पढ़ रहे वंश
जय नारायण स्कूल में इसी साल दसवीं पास करने वाले वंश चतुर्वेदी को एपीजे अब्दुल कलाम की किताबें पसंद हैं। उनकी मांग पर ही उनके मामा ने उनके लिए ‘विंग्स ऑफ फायर’ भेजी है। उन्होंने बताया, एपीजे अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व बहुत प्रभावित करता है, इसलिए उनकी किताबें पढ़ते हैं। इन किताबों से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है। ये किताब उन्होंने हिंदी की बजाय अंग्रेजी माध्यम में ली है जिससे अंग्रेजी भी अच्छी हो।
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अभिभावक पढ़ने को नहीं करते प्रेरित
बुक सेलर गुरु मेहरोत्रा ने बताया, अब तो बच्चे न तो किताबें पढ़ना चाहते हैं और न अभिभावक पढ़ने को प्रेरित करते हैं। कॉमिक्स और बोध कथाएं जैसी किताबों का तो बिल्कुल लोप हो गया है। इस बार मई-जून के महीने में 12वीं तक के बच्चों ने चेतन भगत सबसे ज्यादा, उससे कम अगाथा क्रिस्टी, फिर शिव खेड़ा, डान ब्राउन, रस्किन बॉन्ड, डेनियल स्टील आदि किताबें खरीद रहे हैं। ग्रेजुएशन स्तर के कुछ विद्यार्थी खुशवंत सिंह, शोभा डे और आचार्य चतुरसेन की किताबें खरीदकर ले जाते हैं।
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प्रेमचंद की किताबों से दूर हैं बच्चे
बुक सेलर्स ने बताया, खास बात यह है कि बच्चे प्र्रेमचंद को नहीं पढ़ रहे हैं। हमारे यहां प्रेमचंद की इतनी किताबें होतेे हुए भी कोई भी बच्चा प्रेमचंद को खरीदकर नहीं ले गया। समझ में यह नहीं आ रहा कि बच्चे हिंदी की वजह से नहीं ले जाते या फिर प्रेमचंद की कहानियां उन्हें उनके समय की नहीं लगतीं।

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