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सेहत बिगाड़ रहा यह मांस

Bareilly Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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बेखबर अवाम, सोए अफसर और ‘बीमारी’ बेच रहे कारोबारी
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- मानकों का पालन नहीं कर रहे मांस बेचने वाले
- 700 से ज्यादा विक्रेता, पंजीकरण सिर्फ 160 का
अरविंद सिंह
बरेली। सूरज के झुलसा देने वाले ताप में दुकानों से मांस खरीद रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाइए। इसकी संभावना बहुत ज्यादा है कि यह मांस सेहतमंद बनाने के बजाय आपकी सेहत खराब कर दे। मांस की बिक्री में मानकों का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है। जिन पर इन मानकों के पालन करवाने जिम्मेदारी है, वे सबकुछ जानते हुए भी बेखबर बने हुए हैं। नतीजतन, जिला और निजी अस्पतालों में आने वाले पेट के मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है।
मांस बेचने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग से लाइसेंस लेना जरूरी होता है। नगर निगम में पंजीकरण कराना भी अनिवार्य है। लेकिन, शहर में ज्यादातर दुकानें बिना लाइसेंस के चल रही हैं। यहां तक कि तमाम दुकानों पर बकरों को काटा भी जाता है, जबकि यह सरासर नियमों के खिलाफ है। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में मांस बेचने की 160 दुकानें ही पंजीकृत हैं। कुछ समय पहले नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे के मुताबिक, इन दुकानों की संख्या करीब 350 है। इसमें बकरे के मांस की 130, मछली की 70 और मुर्गे के मांस की 120 और भैंस के मांस 30 दुकानें है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह आंकड़ा सात सौ को पार कर चुका है। इनमें से ज्यादातर दुकानों पर मांस बेचने के लिए तय किए गए मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।


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सिर्फ दो जगह जानवर काटने का लाइसेंस
नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के प्रावधानों के मुताबिक, बकरे और बड़े जानवरों को स्लॉटर हाउस में ही काटा जाना चाहिए। काटने से पहले डॉक्टरों को इनका स्वास्थ्य परीक्षण करना चाहिए। निगम प्रशासन की ओर से मोहनपुर ठिरिया व शाहदाना में स्लॉटर हाउस के लिए लाइसेंस दिए गए हैं। ठिरिया के स्लॉटर हाउस में बड़े जानवर और शाहदाना में बकरों को काटे जाने की व्यवस्था है। इसके अलावा कहीं भी यह जानवर नहीं काटे जा सकते। लेकिन, यहां हर इलाके में मांस कारोबारी जानवरों को काट रहे हैं।
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पहले नगर निगम स्वास्थ्य विभाग की टीम दुकानों पर मांस के नमूने भी लेती थी, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग को सौंप दी गई। इसके अलावा पशुपालन विभाग की भी जिम्मेदारी है कि वह पशुआें के कटान से पहले उनके स्वास्थ्य की जांच करें। लेकिन, नगर निगम समेत तीनों विभाग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। न तो बेचे जा रहे मीट के नमूने लिए जाते और न ही काटे जाने से पहले जानवरों के स्वास्थ्य की जांच होती है।
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यहां हैं बहुतायत में अवैध दुकानें
किला, बीसलपुर रोड, कांकर टोला, जगतपुर, जोगी नवादा, संजय नगर, कुतुबखाना, आजमनगर, सिटी सब्जी मंडी, चौपला चौराहा, सुभाषनगर, डेलापीर, इज्जतनगर, पीर बहोड़ा, एयरफोर्स गेट, डिफेंस कॉलोनी के पास, चाहबाई, मठ लक्ष्मीपुर, सैदपुर हाकिंस, नकटिया, करगैना और सीबीगंज
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ये हैं मानक
- गंदगी वाले इलाके में दुकानें न हों
- दुकानों में चिक या पर्दा लटका रहे
- मांस खुले स्थानों पर नहीं रखा जाए
- सफाई के लिए पानी की समुचित व्यवस्था हो
- प्रमाणित स्वस्थ पशु ही काटे जाएं
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मीट की दुकानों के जांच पड़ताल की जिम्मेदारी सिर्फ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ही नहीं है। एफएसडीए के अलावा नगर निगम व पशुपालन विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस तरफ ध्यान दें। लेकिन, दोनों विभाग कभी कार्रवाई नहीं करते। हम जल्द ही अवैध रूप से मांस बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
सुनील कुमार, चीफ फूड सेफ्टी ऑफिसर
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मीट की अनधिकृत दुकानोें की जांच के लिए शीघ्र ही अभियान चलाया जाएगा। शहर में सिर्फ 160 दुकानों का ही पंजीकरण कराया गया है। इनसे लाइसेंस फीस के बतौर हर साल तीन सौ रुपये लिया जा रहा है। अनधिकृत तौर पर मांस बेचने वालों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का भी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
-डॉ. रवि शर्मा, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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शहर की ज्यादातर दुकानोें पर बिक रहा मांस सुरक्षित नहीं है। गर्मी के मौसम में मांस जल्दी डिकम्पोस्ड हो जाता है। यह मांस संक्रमण की वजह बनता है। इससे पेट के तमाम रोगों की शिकायत हो जाती है। इसलिए इस मौसम में सुरक्षित तरीके से फ्रिज में रखे गए मांस का ही प्रयोग करना चाहिए। वैसे, सबसे बेहतर तो यह है कि गर्मी के मौसम में मांस का सेवन ही न किया जाए।
-डॉ. सुशोभित वर्मा, फिजिशियन

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