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मिट्टी की ढांग गिरने से तीन बच्चियों की मौत

Bareilly Updated Sat, 09 Jun 2012 12:00 PM IST
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आंवला/रामनगर। शुक्रवार को रामनगर के गांव लक्ष्मणपुर के ओमप्रकाश व उनके भाइयों के घर पर कहर टूट पड़ा। गड्ढे में पीली मिट्टी खोदने के दौरान ढांग गिरने से दबकर एक ही परिवार की तीन लड़कियों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गईं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार की सुबह ओमप्रकाश की 10 साल की बेटी सरोज, 14 साल की सोमवती, रामप्रसाद की बेटी मीरा (8) व 12 साल की संगीता, भीमसेन की 10 साल की बेटी शकुंतला एक साथ गांव के ही रूपराम के खेत में बने गड्ढे में से घर में लीपने के लिए मिट्टी खोदने गई थीं। पिछले कई सालों से इस खेत में से मिट्टी खोदे जाने की वजह से यहां काफी गहरा गड्ढा हो गया है। इसी गड्ढे में मिट्टी खोदते समय पांचों बच्चियों के ऊपर कगार (ढांग) टूट कर गिर गई। इसके नीचे पांचों बच्चियां दब गईं। उसी रास्ते से अपने खेत में शिवाली काटने जा रहे प्रेमपाल ने वाकया देखा तो उसने आननफानन मिट्टी हटाकर लड़कियों को निकालने का प्रयास किया। तब तक दूसरे तमाम लोग भी आ गए और सबने मिलकर मिट्टी में दबी हुई लड़कियों को निकाला। इनमें से सरोज की मौके पर ही मौत हो गई थी। शकुंतला की भी थोड़ी देर बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल मीरा को बरेली रेफर कर सोमवती व संगीता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कर लिया गया। बताते हैं कि बरेली में जिला अस्पताल पहुंचने के बाद मीरा की भी मौत हो गई। एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने घटना स्थल का निरीक्षण करने के बाद मृत बच्चियों व घायलों के परिजनों को सांत्वना देते हुए मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से सहायता राशि दिलाने का आश्वासन दिया।
शकुंतला के मां-बाप भी नहीं थे- शकुंतला की मां व पिता भीमसेन की दस वर्ष पहले मौत हो गई थी। मां-बाप की मौत के बाद शकुंतला व उसके भाई उमेश का पालन-पोषण चाचा, ताऊ ने किया था। हमउम्र होने की वजह से शकुंतला व सरोज दोनों अधिकतर समय साथ ही बिताती थीं।

इनसेट
लक्ष्मणपुर में छाया सन्नाटा
आंवला। समय सुबह ग्यारह बजे। गांव लक्ष्मणपुर में प्रवेश करने पर जगह-जगह बैठीं महिलाएं व बच्चे सदमे के मारे सन्न दिखाई दिए। पूछने पर इशारे से बताते हैं कि सामने वाले घर में बच्ची की मौत हुई है। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। आवाज आ रही थी तो मृत बच्ची सरोज के परिवार वालों के चीखने-चिल्लाने की। महिलाएं व पुरुष पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने के साथ ही आपस में बहुत मेलजोल से रहने वाले तीनों भाइयों के परिवार पर हुए इस वज्रपात से काफी आहत भी हो रहे थे। बताते हैं कि तीनों भाइयों जैसा प्यार उनके बच्चों में भी था। इसलिए सभी हमउम्र होने की वजह से ज्यादातर समय साथ ही रहते थे। शकुंतला व उमेश को तो मां-बाप की मौत के बाद चचा व ताऊ ने अपने बच्चों से भी ज्यादा तवज्जो देकर दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया था।

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