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बरेली और तिलहर के अफीम दफ्तर बंद

Bareilly Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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बरेली। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने बरेली और तिलहर (शाहजहांपुर) के जिला अफीम दफ्तर बंद कर दिए हैं। अब काश्तकारों को अफीम की खेती का लाइसेंस लेने या फिर लाइसेंसधारकों को कोई और समस्या होने पर बाराबंकी के जिला अफीम दफ्तर में संपर्क करना होगा। अफीम काश्तकारों की कम तादाद को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इससे बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर में अफीम की खेती करने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने करीब पचास साल पहले बरेली और तिलहर में जिला अफीम दफ्तर खोले थे। यहां जिला अफीम अधिकारी तैनात किए जाते थे। बरेली में सिविल लाइंस स्थित जिला अफीम अधिकारी के दफ्तर का कार्यक्षेत्र बरेली और बदायूं जिला था। लंबे समय से शाहजहांपुर के जिला अफीम अधिकारी का चार्ज भी बरेली के जिला अफीम अधिकारी के पास था। लेकिन, अब दोनों ही दफ्तर बंद कर दिए गए हैं।

इसकी वजह इन जिलों में काश्तकारों की घटती तादाद बताई गई है। सन् 1999-2000 में बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर के ढाई सौ गांवों में करीब पांच हजार किसान अफीम का उत्पादन करते थे। इसके बाद नारकोटिक्स विभाग ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए लाइसेंस देने की शर्तें कड़ी कर दीं। पिछले दशक में एक स्थिति ऐसी आई कि लाइसेंस देना एकदम बंद कर दिया गया। तीन साल पहले सांसद मेनका गांधी की पैरवी के बाद केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने लाइसेंस देना शुरू किया। 2010-11 में बरेली में 78 और बदायूं में 71 किसानों को अफीम का लाइसेंस दिया गया। लेकिन, पिछले साल बरेली में 14 और बदायूं में 26 किसानों को ही लाइसेंस मिला। इसी तरह से शाहजहांपुर में आठ अफीम काश्तकार बचे। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के एक अफसर ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि इतने कम काश्तकारों पर जिला अफीम अधिकारी की तैनाती नहीं की जा सकती थी। इसलिए इन दफ्तरों को बंद कर दिया गया। अब प्रदेश में सिर्फ बाराबंकी में ही जिला अफीम अधिकारी बैठेंगे। इस साल लाइसेंस लेने के इच्छुक किसानों को बाराबंकी के दफ्तर में ही आवेदन करना होगा। ये लाइसेंस अक्टूबर में जारी किए जाते हैं। अलबत्ता, बरेली में निवारण एवं अधिसूचना प्रकोष्ठ का दफ्तर बना रहेगा, जिसका मुख्य काम चेकिंग है। ताकि, अफीम की स्मगलिंग न हो सके।

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