हुसैन बाग में दो बहनों ने किया आत्मदाह

Bareilly Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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बरेली। हुसैन बाग में रहने वाली दो बहनों ने शुक्रवार को सुबह कमरे में बंद होकर अपने कपड़ों में आग लगा ली। धुआं निकलता देख पड़ोसियों ने कमरे का दरवाजा तोड़ा लेकिन तब तक दोनों बहनें पूरी तरह जल चुकी थीं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हुसैन बाग के फारूख सिविल लाइंस के एक शोरूम में काम करते हैं। सुबह करीब नौ बजे उनके पड़ोसी इशरत ने देखा तो फारूख के ऊपर वाले कमरे से धुआं निकल रहा था। इशरत ने शोर मचाया तो आसपास के लोग पहुंच गए। देखा तो घर का मुख्य गेट अंदर से बंद था। कुछ लोग इशरत के घर में होकर छत पर पहुंचे, लेकिन कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। जैसे-तैसे हथौड़े से दरवाजा तोड़ा तो अंदर फारूख की बेटियां खुशनुमा और हुस्ना आग की लपटों के बीच जमीन पर गिरी मिलीं। उन लोगों ने पानी डालकर आग बुझाई। इस बीच घर वाले भी पहुंच गए। मगर तब तक खुशनुमा और हुस्ना दम तोड़ चुकी थीं। पता चला तो एसपी सिटी शिव सागर सिंह, सीओ आनंद कुमार और किला पुलिस मौके पर पहुंच गई। लाशों से मिट्टी के तेल की बू आ रही थी। कमरे में प्लास्टिक की केन मिली, जिसमें बचा हुआ मिट्टी का तेल भी मिला। पास ही माचिस रखी थी।
खुशनुमा की उम्र 22 साल और हुस्ना 18 वर्ष की थी। हमेशा की तरह शुक्रवार को भी फारूख और उनका बड़ा बेटा अफरोज सुबह आठ बजे ही घर से निकल गए। छोटा बेटा परवेज क्रिकेट खेलने चला गया। फारूख की पत्नी मुनव्वर जहां पड़ोसी के घर कुरानख्वानी में गई थीं। इस हादसे के वक्त दोनों बहनें ही घर पर थीं।

अवसाद में रहती थी खुशनुमा
परवेज के मुताबिक चार-पांच साल से खुशनुमा परेशान थी। बताते हैं कि उस पर ऊपरी चक्कर था। अक्सर वह घर के बर्तन और सामान फेंकने लगती। झाड़ फूंक के लिए भी ले गए, लेकिन कोई फायदा फायदा नहीं हुआ। उसकी शादी के रिश्ते नहीं आ रहे थे और इसी वजह से वह अवसाद में रहती थी। पड़ोसियों के मुताबिक खुशनुमा मानती थी कि भाइयों की शादी हो जाने के बाद उसे दिक्कतें आएंगी।

दोनों बहनों के बीच था गहरा प्रेम
खुशनुमा और हुस्ना कर एक-दूसरे के प्रति गहरा अनुराग था। दोनों साथ ही खाती-पीती और सोती थीं। करीब महीने भर पहले पड़ोस के मोहल्ले बाकरगंज से हुस्ना की शादी को रिश्ते वाले आए। रिश्ता तय तो नहीं हुआ, लेकिन दोनों पक्षों के बीच में बात चल रही थी। खुशनुमा को लगा कि बहन की शादी हो जाने के बाद वह अकेली रह जाएगी। दूसरे हुस्ना भी उसे छोड़कर जाने की बात पर परेशान हो उठती थी।

नहीं किया बचने का प्रयास
मौके के हालात के देखकर लगा कि दोनों बहनों ने मिट्टी का तेल अपने ऊपर उलटकर आग लगाई थी। जलते हुए दोनों ने खुद को बचाने की कोशिश नहीं की। जिस कमरे में उन्होंने आग लगाई गई उसमें लकड़ी, कपड़े व अन्य सामान था। दोनों बहनें फर्श पर्र बराबर में पड़ी मिलीं। कमरे में रखी लकड़ी या दूसरे सामान तक आग पहुंची ही नहीं।

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