संदिग्ध हालात में स्वास्थ्य कर्मी का शव घर में मिला

Bareilly Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
बरेली। राजेन्द्र नगर खुद के मकान में करीब चार दिन पुराना टीबी हास्पिटल के लिपिक का शव मिला। दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने शिकायत की तो पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव निकाला। जानकारी होने पर मृतक के भाई मौके पर पहुंचे। प्रेमनगर पुलिस के साथ डॉग स्क्वायड और फिंगर प्रिंट की टीम ने भी घटनास्थल की छानबीन की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। पेट में जहरीला पदार्थ होने की आशंका पर बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है।
विज्ञापन

राजेन्द्र नगर में 32 वर्षीय मनोज कुमार सिन्हा रहते थे। मकान में पत्नी करुणा संग तीन वर्षीय बेटा शिखर और एक वर्षीय बेटी मौली भी साथ में रहते थे। मार्च 2012 में पति से विवाद होने पर पत्नी बच्चों को लेकर इन्द्रा नगर स्थित मायके में रहने लगी। टीबी हास्पिटल में बतौर लिपिक काम करने वाले मनोज ने एक माह से अवकाश ले रखा था। पत्नी के साथ हुए विवाद और दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को लेकर वह काफी परेशान रहते थे। शनिवार की सुबह मकान से तेज दुर्गंध आने पर पड़ोस के सुरेन्द्र ने मनोज के भाई राजकुमार निवासी बसंत बिहार को फोन करके बुलाया। मामले की जानकारी होने पर प्रेमनगर इंस्पेक्टर सोमदत्त शर्मा भी मय फोर्स के घटनास्थल पर पहुंच गए। दरवाजा तोड़ा गया तो गलियारे में ही ऊपर जाने वाली सीढ़ी से टिका हुआ मनोज का शव मिला। मौके पर डॉग स्क्वायड और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम भी बुलाई गई। पुलिस करीब घंटे भर सुरागरसी में लगी रही मगर कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा। शव नीला पड़ा चुका था और कई जगह पर कीड़े भी पड़ गए थे। शाम तक पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
-
घटनास्थल एक नजर में
सामने के कमरे में देशी शराब की दो बोतलें पड़ी थीं। एक बोतल खाली तो दूसरी भरी थी। एक सिरिंज का खुला पैकेट सोफे पर था। आंगन में जूठे बर्तन पड़े थे। बेडरूम अस्त-व्यस्त था। बेडरूम में फैशन बाइक खड़ी थी।
-
एक माह से थे अवकाश पर
मनोज के मौत की सूचना पर जिला क्षय रोग अधिकारी आरएस अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मनोज एक माह से अवकाश पर थे। पत्नी से हुए विवाद और मुकदमे की वजह से काफी परेशान रहा करते थे। अक्सर अपनी परेशानी बताते हुए जेल जाने से डरने की बात करते थे।
-
मुझे बचा लो
अकेला रहने के कारण मनोज बीमार रहने लगे थे। सूत्रों के मुताबिक करीब सप्ताहभर पूर्व शाम के समय उनके मकान से आवाज आई कि ‘मुझे बचा लो नहीं तो बीमारी से मर जाऊंगा।’ आवाज लगाने पर कोई इसलिए उनके मकान में नहीं गया कि वह आसपास के लोगों से ज्यादा मतलब नहीं रखते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us