घर से निकलो तो मां की दुआएं साथ ले लेना

Bareilly Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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अमर उजाला कार्यालय के कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने मां के नाम दिया प्यार भरा पैगाम
सिटी रिपोर्टर
बरेली। मां ही है जिसके वजूद में सारा संसार समाया हुआ है। उसकी ममता दुनिया की सारी नियामतों से बढ़कर है। कठिन से कठिन दौर में जब साया भी साथ छोड़ देता है, मां ही होती है जो सहारा बनती है और अपनी औलाद के आगे किसी भी मुश्किल के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। मदर्स डे से बेहतर और क्या दिन हो सकता था मां के प्रेम और त्याग को याद करने का। अमर उजाला कार्यालय में रविवार को आयोजित कार्यक्रम ‘एक पैगाम मां के नाम’ में शहर के कुछ चुनिंदा लोगों को यह मौका मिला।
बतौर विशिष्ट अतिथि बरेली कॉलेज के शिक्षक डॉ. एसी त्रिपाठी ने कहा कि मदर्स डे मां को शिद्दत से महसूस करने का दिन है। जिंदगी में बहुत आपाधापी है, लेकिन मां का एहसास बनाए रखना जरूरी है। क्योंकि मां ही है जो दुख में प्यार से थपकी देकर सारी तकलीफ दूर कर देती है। वह ही पहली गुरु, प्रेरणा और दोस्त भी होती है। बच्चों के लिए मां जो त्याग करती है, वह कोई और नहीं कर सकता। कुरान की आयतों में कहा गया है कि मां के कदमों में ही जन्नत होती है। डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि मां को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जब भी कोई मुश्किल दौर होता है, तब मां ही याद आती है। उन्होंने कहा कि उन्हें बखूबी याद है कि जब कई लोग उन्हें और उनकी बहन को उच्च शिक्षा दिलाने का विरोध करते थे। उनकी मां ने हमेशा उन लोगों को यही कहा कि उन्हें पता है कि उनकी बेटियों को कितनी शिक्षा की जरूरत है। मां की मेहनत का ही नतीजा है कि वह बरेली कॉलेज में शिक्षक हैं और उनकी छोटी बहन पीसीएस अफसर। डॉ. राहुल अवस्थी ने कहा कि मदर्स डे मां को याद करने का दिन है। मां की स्नेह भरी थपकी और उसके आंचल की छांव बच्चों के सारे दुखों को दूर कर देती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी कितनी भी हाईटेक क्यों न हो, लेकिन मां के प्रति उसका स्नेह कम नहीं हुआ है।
अमर उजाला ने मां के प्रति अपना प्यार जताने को पत्र, कविता और गीतों की शक्ल में प्रविष्टियों को भी आमंत्रित किया था। इसके जवाब में सैकड़ों प्रविष्टियां मिलीं। इनमें श्रेष्ठ चुनी गई 20 कविताओं और पत्रों को लिखने वाले स्वस्तिक, दीक्षा, आयुषी, मानवी, अंशिका, कृतिका आदि भी लोग भी रविवार को अमर उजाला के मंच का हिस्सा थे। इन्होंने अपनी कविताएं और पत्र पढ़कर सुनाए। प्रतिभागी कमल भाटिया ने बताया कि उनकी कई कविताएं अमर उजाला में भी प्रकाशित हुई हैं। स्वर्गवासी होने से पहले तक उनकी मां ने इन सारी कतरनों को काफी संभालकर रखा था। रूपम सकलानी को उनकी बेटी ने उपहार के तौर पर एक तस्वीर बनाकर दी थी, जिसे लेकर वह अमर उजाला के कार्यक्रम में शरीक हुईं।

सर्वश्रेष्ठ तीन कविताओं को प्रकाशित करेगा अमर उजाला
अमर उजाला की ज्यूरी ने श्रेष्ठ चुनी गई 20 कविताओं में से तीन सर्वश्रेष्ठ कविताओं को भी चुना है। यह कविताएं हिमांशु जोषी, अंजलि वर्मा और दीक्षा गुप्ता की हैं। जल्द ही इन कविताओं का अमर उजाला में प्रकाशन भी किया जाएगा।

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