कटौती तो होगी, कब और कितनी यह न पूछिए

Bareilly Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
बिजली विभाग की तमाम सुविधाएं सिर्फ कागजों में, शहरियों को पता नहीं लग पाती इमरजेंसी रोस्टिंग की वजह
रोजाना होता है चार-पांच घंटे अतिरिक्त कटौती
सिटी रिपोर्टर
बरेली। बिजली अगर बेवक्त गुल है तो इसकी तमाम वजह हो सकती हैं। यह शेड्यूल रोस्टिंग भी हो सकती है और इमरजेंसी रोस्टिंग भी। कोई लोकल फाल्ट भी इसकी वजह हो सकता है। यह अलग बात है कि शहरियों को यह कभी पता नहीं लगता कि उनके इलाके में बिजली आखिर क्यों गुल है। यूं यह जानकारी देने के लिए बिजली विभाग में नियम तो तमाम हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं होता।
गर्मियां शुरू होने के बाद से ही शहर के अलग-अलग इलाकों में शेड्यूल रोस्टिंग के अलावा चार-पांच घंटे की एक्स्ट्रा रोस्टिंग होती है। ज्यादातर इसकी वजह लोकल फाल्ट होते हैं, लेकिन महकमे के अफसरों के लिए इसे स्वीकार करना या कागजों पर दर्ज करना अपनी गर्दन फंदे में फंसाने जैसा है लिहाजा बिजली विभाग में ज्यादातर लोकल फाल्ट रिकॉर्ड ही नहीं होते। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के मुताबिक शेड्यूल रोस्टिंग और प्राकृतिक आपदा के अलावा किसी भी परिस्थिति में बिजली कटौती की पूर्व सूचना हर हालत में उपभोक्ताओं को दी जानी चाहिए। लेकिन चूंकि सबसे ज्यादा लोकल फाल्ट की वजह से ही बिजली गुल रहती है, लिहाजा ऐसा मुमकिन नहीं होता। लखनऊ से तय शेड्यूल के मुताबिक रोस्टिंग दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक चार घंटे का है। मगर लोगों को 16 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिल पाती। लखनऊ की कंट्रोलिंग यूनिट में शहरी और देहात का रोस्टर चार्ट हर सप्ताह बनता है। नियमानुसार रोस्टिंग चार्ट मीडिया को उपलब्ध कराने के साथ सबस्टेशनों पर चस्पा होना चाहिए, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता।

जर्जर तार लोकल फाल्ट की वजह
लोकल फाल्ट की खास वजह पुरानी हो चुकी बिजली की लाइनें और कटिया कनेक्शन हैं। यह बात अफसर भी मानते हैं। दूसरी वजह ओवरलोडिंग, ट्रांसफार्मर से तेल चोरी और उनमें आग लग जाना है। सबसे ज्यादा फाल्ट पुराना शहर, संजय नगर, मुंशी नगर, सनसिटी विस्तार, पीलीभीत बाईपास रोड की कालोनियां, हरूनगला, बड़ा बाजार, बिहारीपुर, कुंवरपुर, साहूकारा, शांति विहार, परवाना नगर, मढ़ीनाथ, करगैना आदि इलाकों में होते हैं।

बेतहाशा कटौती से पानी का भी संकट
बेतहाशा और अनियमित बिजली कटौती और लो वोल्टेज का असर पानी की आपूर्ति पर भी पड़ता है। नगर निगम जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता आरबी राजपूत के मुताबिक बिजली कटौती ज्यादा होने से पानी के टैंक फुल नहीं हो पाते हैं। इस वजह से टोटियों में पानी का प्रेशर घट जाता है। लोकल फाल्ट होने पर तो ट्यूबवेल ही नहीं चल पाते। कुछ ट्यूबवेल्स पर इस समस्या से निपटने को जनरेटर लगाए गए हैं।

शिकायत के लिए सुविधाएं तमाम पर कारआमद कोई नहीं
शिकायत दर्ज कराने के लिए बिजली विभाग ने टोल फ्री नंबर 18001808752 और 205222201634 जारी किए हैं। यूं प्रावधानों के मुताबिक कोई भी प्रथम सूचना संबंधित सबस्टेशन के बेसिक फोन पर भी दर्ज कराई जा सकती है। सुबह नौ बजे से रात के नौ बजे के बीच कंट्रोल रूम के नंबर 2427162 पर फोन किया जा सकता है। इसके अलावा इलाके के जेई, एसडीओ और आला अफसरों को फोन पर बताया जा सकता है। हालांकि यह अलग बात है कि इन तमाम सुविधाओं में से एक भी लोगों को राहत नहीं दे पाती। फोन कहीं का भी हो, रिसीव ही नहीं होता।

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