इंतजामिया बेपरवाह, फिजूल हुए यात्री शेड

Bareilly Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
चलते-फिरते सवारियां भरने के आदी ऑटो वालों को कायदा सिखाने की दिलचस्पी न नगर निगम, न पुलिस में
सिटी रिपोर्टर
बरेली। यात्रियों की सहूलियत के लिए शहर में पीपीपी मोड के तहत तेइस यात्री शेड तो बनाए गए मगर उनका उपयोग भी सुनिश्चित हो, इसके लिए इंतजामिया ने कोई कदम नहीं उठाया। नतीजा यह है कि ज्यादातर यात्री शेड पर कब्जे हो गए है या फिर उनका हाल ही कुछ ऐसा कि लोग वहां खड़े नहीं हो सकते। जिस एजेंसी को इनके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है, वह विज्ञापन लगाने के सिवा कुछ नहीं करती। काफी यात्री शेड तो जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। अगर ट्रैफिक पुलिस यहां ऑटो रिक्शे रुकवा सके तो न सिर्फ ये यात्री शेड आबाद हो जाएंगे, बल्कि जगह-जगह लगने वाले जाम और हादसों से भी काफी हद तक मुक्ति मिल सकती है।
सन् 2005 में सेलवेल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ 60 यात्री शेड बनाने का नगर निगम ने करार किया था। तय हुआ था कि जहां ऑटो रिक्शा या महानगर बस सेवा की बसों के रुकने लायक जगह हो वहां इन्हें बनाया जाएगा। बदले में निर्माण कराने वाली एजेंसी निर्माण पूरा होने के अगले दस साल तक यहां विज्ञापन लगा सकेगी। उसे हर साल 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से शुल्क भी नगर निगम में जमा करना होगा। लेकिन, नगर निगम सिर्फ 23 स्थानों पर ही यात्री शेड बनाने के लिए जगह मुहैया करा सका। सन् 2010 तक इन सभी 23 स्थानों पर शेड बना दिए गए। शर्त के मुताबिक, यात्री शेडों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी की ही होगी।
यात्री शेड बनाए तो गए, मगर इनके निर्माण के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इनके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजतन कहीं ठेले वालों ने तो कहीं रिक्शे और टैक्सी वालों ने कब्जा जमा लिया। सिटी स्टेशन के पास बने यात्री शेड पर चाय बेचने वाले ने कब्जा जमा लिया है। उसके इर्द-गिर्द रिक्शे वाले खड़े रहते हैं। कचहरी पर बने यात्री शेड पर जूस बेचने वालों ने कब्जा कर लिया है। अयूब खां-चौपुला चौराहे रोड पर बने यात्री शेड पर भी कब्जा हो गया है। मेथोडिस्ट इंटर कॉलेज के पास वाला यात्री शेड खस्ताहाल है। इसका फर्श उखड़ गया है। यहां रिक्शे वाले काबिज रहते हैं। बिशप मंडल इंटर कॉलेज के पास वाले शेड पर जूस बेचने वालों ने कब्जा जमा लिया है। डेलापीर क्षेत्र में जितने शेड हैं या तो उन पर अतिक्रमण हो चुका है या फिर शराब पीने वाले खड़े रहते हैं, जिससे यात्री यहां आते ही नहीं। विकास भवन रोड पर बने यात्री शेड का भी समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। पूरे समय यह खाली पड़े रहते हैं।
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यहां बने हैं यात्री शेड
चौकी चौराहे पर दो शेड, अयूब खां-चौपुला रोड पर दो, सिविल लाइंस में अशोका फोम और एमसीआई प्लाजा के पास एक, कंपनी गार्डन के पास दो शेड, विकास भवन भवन रोड पर दो शेड, प्रेमनगर में धर्मदत्त सिटी अस्पताल के पहले एक शेड, डेलापीर चौराहे, डेलापीर पुलिस चौकी, किला में दूल्हा मियां की मजार के पास, सर्किट हाउस चौराहे पर वोहरा नर्सिंग होम के पास, कुदेशिया फाटक के पास, सेटेलाइट बस स्टेशन और शाहदाना में बारादरी थाने के पास, स्टेडियम रोड पर संजय नगर तिराहे पर और महाजन अस्पताल के सामने, केसलता अस्पताल के सामने एक-एक यात्री शेड।
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रखरखाव नहीं करतीं विज्ञापन एजेंसी
करार के मुताबिक, यात्री शेड बनाने वाली विज्ञापन एजेंसी को उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी गई थी। लेकिन यह एजेंसी यात्री शेड बनाने के बाद से यहां विज्ञापन तो लगा रही है, मगर उसने इनके मेंटिनेंस पर कोई ध्यान नहीं दिया। यही वजह रही कि यात्री शेडों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो गया। नगर निगम के अफसर भी विज्ञापन का शुल्क जमा करवाने की भूमिका तक ही सिमटकर रह गए।

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कारगर बनाएंगे यह सिस्टम : एसपी ट्रैफिक
एसपी ट्रैफिक डीपी सिंह के मुताबिक, चौराहे से पचास मीटर की परिधि में टेंपो वाले खड़े नहीं हो सकते। इसके लिए टीएसआई और ट्रैफिक सिपाहियों को निर्देश दे दिया गया है। अगर इस दायरे में सवारियां बैठाते या उतारते टेंपो मिला तो ड्यूटी पर मौजूद पुलिस कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चौराहे के पास बने यात्री शेड के सामने ही टेंपो रुकेंगे। यात्री शेड के पास गाड़ियां रोकने के लिए चालकों को भी प्रेरित किया जाएगा।
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कुछ नहीं करती सड़क सुरक्षा समिति भी
यातायात व्यवस्था में सुधार और सुझाव के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति बनी है। इसके अध्यक्ष डीएम और सचिव एसएसपी हैं। इनके अलावा एसपी ट्रैफिक, नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के अफसर, ट्रांसपोर्टर और व्यापारी भी इसमें शामिल हैं। हर माह समिति की बैठक होने का नियम है। इसमें यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव और उनके अनुपालन पर चर्चा होती है। मगर पिछले करीब छह महीने से समिति की बैठक ही नहीं हुई। अगर सड़क सुरक्षा समिति में शामिल लोग यात्री शेड के समुचित उपयोग के लिए जनजागरूकता अभियान चला दें तो शहर को एक बड़ी समस्या से निजात मिल सकती है।
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यह सही है कि 60 यात्री शेड बनाने का लक्ष्य था, मगर जगह के अभाव में यह पूरा नहीं हो सका। कई बार अभियान चलाकर यात्री शेड से अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन अतिक्रमणकारी फिर काबिज हो गए। कोशिश रहेगी कि पुलिस और पीडब्लूडी के लोगों के सहयोग से लगातार अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाए। -डीके सिन्हा, उपनगर आयुक्त

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