बेटी की सलामती के लिए मां ने फैलाए हाथ

Bareilly Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
हादसे के शिकार घायलों के परिजनों की करुण कहानी
सिटी रिपोर्टर
बरेली। या खुदा मदद कर। मेरी बच्ची की जान बक्स दे। उसके इलाज को इतने रुपये कहां से लाऊं? मेरे पास तो फूटी कौड़ी तक नहीं। गरीब, लाचार शरीफन हादसे में गंभीर घायल हुई बेटी साइमा की सलामती की दुआ मांग रही थी। बुधवार की दोपहर अस्पताल में बैठी शरीफन कभी फूटकर रोने लगती, कभी दोनों हाथ फैलाकर बेटी के लिए दुआ मांगने लगती थी।
दरअसल मंगलवार की शाम मैक्स जीप से टकराने वाले ट्रैक्टर में जितने लोग भी घायल हुए सारे गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस में एक निजी अस्पताल भिजवा दिया था। बुधवार को ज्यादातर मरीज छुट्टी कराकर अस्पताल से चले गए। बीसलपुर (पीलीभीत) इलाके के पहाड़गंज निवासी शरीफन की 12 वर्षीय बेटी साइमा उर्फ चपटा, तहसील खां की बेटी शमा, मस्तान खां की बेटी बल्ली, सुहेल की हालत नाजुक है।
शरीफन के पति याकूब का इंतकाल हो चुका है। उनके चार बेटे और चार ही बेटी हैं। शरीफन के मुताबिक उसने सिला बीनकर डेढ़ सौ रुपये जुटाए थे, जो हादसे के दौरान खो गए। बेटे मजदूरी करके जो कमाते उससे बमुश्किल घर का खर्च चल पाता है। अब शरीफन के सामने सबसे बड़ी समस्या बेटी के इलाज के लिए रुपयों की है। बीती रात रिश्तेदारों की मदद से दवाइयों के लिए कुछ रुपये जुट गए थे। मगर अस्पताल का भुगतान और आगे का इलाज बाकी है। मजदूर हाशम खां के मुताबिक उसके बेटे सुहेल के इलाज में दवाओं को छोड़कर 20 हजार रुपये का बिल बन चुका है। इतने रुपये वह कहां से लाए। यही नहीं हादसे के शिकार हुए बाकी लोगों के सामने इलाज का संकट है।

नहीं पसीजे नेता और सामाजिक संगठन
करीब महीना भर पहले की बात है। विधानसभा चुनाव से पहले किसी को भी जरा कुछ होने का पता लगने पर सभी पार्टियों के नेता अस्पताल पहुंच जाते थे। मगर इतना बड़ा हादसा के बाद भी बुधवार दूसरे दिन भी कोई नेता घायलों का हालचाल लेने नहीं गया। इसकी एक वजह यह है कि लोकसभा चुनाव अभी दूर हैं। नेताओं को तो छोड़िए इस मामले समाजसेवियों का दिल भी नहीं पसीजा।

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