10 हजार गन्ना किसान सांसत में

Barabanki Updated Fri, 22 Nov 2013 05:41 AM IST
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हैदरगढ़ (बाराबंकी)। गन्ना मूल्य निर्धारण के बाद पोखरा स्थित हैदरगढ़ चीनी मिल प्रशासन ने मिल चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। मिल प्रशासन के इस फैसले से गन्ना किसानों की नींद उड़ गई है। किसानों का कहना है कि खेत में फसल तैयार खड़ी है और यदि मिल नहीं चली तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे, क्योंकि उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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इस बार जिले में करीब 45 सौ हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की बोआई की गई है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 10 हजार से अधिक किसानों ने गन्ने की बोआई की हैै, जिनके गन्ने की पेराई हैदरगढ़ चीनी मिल के द्वारा की जाती है। इस मिल के अंतर्गत जिले की पांच समितियां बुढ़वल, हैदरगढ़, दरियाबाद, बाराबंकी और जुग्गौर आती हैं, जिनके माध्यम से किसानों का गन्ना मिल को भेजा जाता है। पोखरा स्थित हैदरगढ़ चीनी मिल द्वारा बीते सत्र में 47 लाख 45 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी। गत वर्ष भी चीनी मिल देर से चली थी, जिससे किसानों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। गन्ना किसानों का कहना है कि फसल खेत में तैयार खड़ी है और मिल की और से अभी तक कोई पहल नहीं किए जाने से उनकी रातों की नींद उड़ गई है। उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि मिल द्वारा गन्ना नहीं खरीदा जाता है तो इसे खेतों में जला देना ही एक मात्र विकल्प होगा। वहीं गन्ना मूल्य निर्धारण के बाद मिल प्रशासन ने मिल चलाने से पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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मिल नहीं चली तो हो जाएंगे बर्बाद
क्षेत्र के गढ़ी निवासी गन्ना किसान विजय कुमार कहते हैं कि फसल खेत में तैयार खड़ी है। केवल चीनी मिल ही एक मात्र सहारा है, लेकिन वह भी इस बार नहीं चलेगी। क्षेत्र में कोई क्रेशर भी नहीं है, जहां ले जाकर वह अपना गन्ना बेच सकें। शुरूआती दौर को छोड़ दिया जाए तो कभी भी मिल समय से नहीं चली। यही कारण रहा कि गन्ना किसानों का मोह धीरे-धीरे गन्ने की खेती से भंग होता गया और गन्ने का क्षेत्रफल प्रतिवर्ष घटता गया। कहा कि यदि मिल गन्ना नहीं खरीदती है तो वह तो पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे। असंद्रा निवासी गन्ना किसान रामनरेश बताते हैं कि यदि उनका गन्ना एक सप्ताह के अंदर नहीं खरीदा गया तो वह इसे खेत में ही जला देंगे। क्योंकि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। गन्ना खेत में लगा होने की वजह से गेहूं और सरसों की बोआई तक नहीं की जा सकी है। इस बार गन्ना किसानों को बर्बादी से कोई बचा नहीं सकता है।

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सरकार से घोषित मूल्य पर गन्ना खरीदकर चीनी मिल चलाने में घाटा है। बीते दो वर्षों में चीनी का बिक्री मूल्य कम हुआ है, जिससे मिल बीते वर्ष गन्ना खरीद का दस प्रतिशत भुगतान नहीं कर सकी है तथा बैंकों की उधारी का बोझ लदा है। निर्धारित मूल्य पर पेराई सत्र शुरू नहीं किया जाएगा।
केेपी सिंह, अधिशासी अध्यक्ष, हैदरगढ़ चीनी मिल

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पोखरा स्थित हैदरगढ़ चीनी मिल न चलाए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। मिल प्रशासन से बराबर उनकी वार्ता चल रही है। यह बात अलग है कि इस बार मिल चलने में देरी हो रही है। गन्ना किसानों की समस्या का हल बहुत जल्द निकाल लिया जाएगा। शासन से इस बाबत दिशा निर्देश मांगे गए हैं।
रणजीत सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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