बेचे जा रहे रजिस्टर्ड डाक के नकली लिफाफे

Barabanki Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
बाराबंकी। एआरटीओ कार्यालय में रजिस्टर्ड डाक के फर्जी लिफाफे खपाए जाने के मामले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। फर्जीवाड़ा पकडे़ जाने पर डाक विभाग को अवगत भी कराया गया। लेकिन कार्रवाई करने के बजाए डाक विभाग मामले पर पर्दा डालने के लिए चुप्पी साध गया। उधर इस घटना के बाद एआरटीओ कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है और एआरटीओ प्रशासन ने कार्यालय में आने वाले सभी रजिस्टर्ड पत्रों को जांच के बाद ही डिस्पैच करने का आदेश जारी कर दिया है। इस गोरखधंधे में अब सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक जिस एजेंट का नाम प्रकाश में आया है उसने पूछताछ में यह लिफाफे लखनऊ ट्रांसपोर्ट कार्यालय से लाए जाने की बात कही है। इससे जाहिर है कि यह फर्जीवाड़ा लंबे स्तर पर चल रहा है और बाराबंकी ही नहीं अन्य जिलों में भी गिरोह सक्रिय हो सकता है।
मालूम हो कि ड्राइविंग लाइसेंस में होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय से इन लाइसेंस को रजिस्टर्ड डाक द्वारा आवेदक के पते पर भेजे जाने के निर्देश दे रखे हैं। रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्टर्ड डाक का लिफाफा आवेदक द्वारा दिया जाता है। आवेदन पत्र के साथ जमा होने वाले इन्हीं रजिस्टर्ड डाक के लिफाफों की आड़ में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। एआरटीओ कार्यालय मेें जमा किए गए छह आवेदन पत्रों के साथ लगे डाक विभाग के लिफाफे नकली पाए गए। मामला प्रकाश में आते ही विभाग में हड़कंप मच गया और इस संबंध में डाक विभाग को भी अवगत किया गया। डाक निरीक्षक ने मामले की जांच भी की। लेकिन विभाग ने इस गंभीर प्रकरण में कार्रवाई करने के बजाए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। यही नहीं निरीक्षक ने जांच के बाद अपने विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में भी यह प्रकरण नहीं डाला। जबकि साढ़े बाइस रुपये कीमत के इस लिफाफे से डाक विभाग को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
उधर इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन राजेश्वर यादव ने कार्यालय में आने वाले रजिस्टर्ड डाक के लिफाफों को पूरी तरह जांच के बाद ही डिस्पैच करने का आदेश जारी किया है। मुख्य डाक घर में तैनात डाक निरीक्षक पीएन तिवारी ने बताया कि यह प्रकरण उनके संज्ञान में है। पांच दिन पूर्व एआरटीओ कार्यालय जाकर उन्होंने इस प्रकरण की जांच भी की थी और डिस्पैच बाबू को इस संबंध में सावधानी बरतने की बात कही थी। लेकिन इसके बावजूद आखिर क्यों पीएन तिवारी ने इस गंभीर प्रकरण को अपने विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में नहीं डाला। जिसके चलते पांच दिन पूर्व प्रकाश में आया यह प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया।

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