फर्श पर तड़पती रही प्रसूता, सोता मिला स्टाफ और मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव

Barabanki Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
बाराबंकी।
केस एक- हैदरगढ़ में सोमवार की रात 9.40 बजे सीएचसी हैदरगढ़ में चौकीदार सुनील बरामदे के बाहर बैठा था। वार्ड ब्वॉय बृजमोहन बाहर टहल रहे थे। बारा की आशा विनोद कुमारी प्रसव पीड़िता शोभा पाल को लेकर सीएचसी आई थी। प्रसूता फर्श पर पड़ी दर्द से छटपटा रही थी और सीएचसी पर डॉक्टर से लेकर स्टाफ के नाम पर कोई मौजूद नहीं था। जानकारी पर बताया कि इमरजेंसी में डॉ. सचिन की ड्यूटी है पर वह भी अपने आवास पर सो रहे हैं। कई बार उन्हें बुलाया गया मगर आवास से नहीं आए। स्टाफ नर्स सुधा को मामले की जानकारी दी गई पर वह नींद में इस तरह मशगूल थीं कि छायाकार ने उन्हें अपने कैमरे में कैद कर लिया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। परिसर में अंधेरा पसरा था यहां पर लगा जनरेटर महज शो पीस बनकर रह गया है। बाहर लगा सोलर लैंप जल रहा था, जिससे सीएचसी पर थोड़ा बहुत उजाला था। सीएचसी प्रभारी डॉ. एसबी राय ने पूरे मामले की जानकारी से ही इंकार कर दिया। कहा जांच कराकर पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे।
केस २- त्रिवेदीगंज में रात 10.30 बजे सीएचसी त्रिवेदीगंज का नजारा भी व्यवस्था की पोल पट्टी खोल रहा था। बेलहरी निवासी सुरेश प्रसव पीड़ा पर पत्नी सुषमा को शाम साढ़े छह बजे लाया था। सुरेश ने बताया कि हेल्थ वर्कर सरशम्मा ने देखा और इंतजार करने की बात कहकर चली गई। चार घंटे हो गए हैं, अभी तक वापस नहीं आई। पूरे परिसर में अंधेरा पसरा था यहां पर लाइट की कोई व्यवस्था नहीं थी। जनरेटर मौजूद है पर कब चलाया जाता है इसकी जानकारी कोई नहीं दे सका। डॉक्टर के नाम पर यहां पर भी कोई मौजूद नहीं था। जानकारी करने पर पता चला कि हेल्थ वर्कर और स्टाफ नर्स अनुरिता मच्छरदानी लगाए खर्राटें भर रही थीं। छायाकार ने इन्हें भी अपने कैमरे में कैद किया पर इनको भी इस बात की जानकारी नहीं हो सकी।
केस ३-रामनगर में रात करीब 9.30 बजे रामनगर सीएचसी पर घुप्प अंधेरा पसरा हुआ था। डॉक्टरों के नाम पर यहां पर भी कोई मौजूद नहीं था। बीएचडब्ल्यू के अलावा स्टाफ के नाम पर कोई नहीं था। यहां पर तीन प्रसव कराए गए वह भी मोमबत्ती की रोशनी में क्योंकि जनरेटर चल नहीं रहा था और लाइट आ नहीं रही थी। बीएचडब्ल्यू ने बताया कि शबाना पत्नी रफीक निवासी मल्लापुर की हालत काफी गंभीर थी किसी तरह बच्चे का जन्म कराकर महिला की जान बचाई गई। रामनगर की रहने वाली उस्मान की पत्नी रैसुल निशा का प्रसव कराया गया। इसके बाद टिहुरकी निवासी निर्भय पत्नी ऊषा का किसी तरह से प्रसव कराकर दोनों की जान बचाई गई। तीनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं। अधिवक्ता बीडी खान ने बताया यह कोई पहला वाकया नहीं है, यहां पर अक्सर मोमबत्ती के उजाले में प्रसव कराए जाते हैं। मामले की जानकारी रात में ही सीएमओ को दी तो उन्होंने दो टूक कहा कि मैं क्या कर सकता हूं। जिस पर उन्होंने रात में ही स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई है। सीएचसी प्रभारी वीरेन्द्र आर्या ने कहा कि डॉक्टर केंद्र पर नहीं थे इसकी जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी लेने वाले स्लोगन लिखे होर्डिंग्स जगह-जगह देखे जा सकते हैं। लेकिन वास्तविकता के धरातल पर मरीजों के अरमान चकनाचूर हो रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने सोमवार की रात अमर उजाला की टीम ने अस्पतालों का जायजा लिया तो एक बार फिर सरकारी दावों की पोल खुल गई।
बेेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भले ही करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा हो मगर स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं से आज भी लोग कोसों दूर हैं। स्वास्थ्य केंद्रों के भवन निर्माण से लेकर संसाधन जुटाने तक करोड़ों रुपया खर्च किया गया इसके बावजूद हालात में कोई बदलाव नहीं आया। स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारी पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुके हैं। मरीजों, प्रसूताओं को फर्श पर लिटा दिया जाता है। जनरेटर लगा है फिर भी मोमबत्ती के उजाले में प्रसव कराए जा रहे हैं।
केंद्रों पर हद दर्जे की लापरवाही बरती जा रही है। चेतावनी और कार्रवाई के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। सीएमओ डॉ. डीआर सिंह से जब सीएचसी और पीएचसी के इन हालत की बावत जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि यह सब झूठ हैं। हर सीएचसी, पीएचसी पर बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं, इतना कहने के बाद फोन काट दिया और दोबारा फोन ही नहीं उठाया। जब विभाग से जुड़े आला अफसर ही ऐसा कह रहे हैं तो मातहतों का रवैया कैसा होगा, इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है-
निजाम बदला मगर नहीं बदली तस्वीर
शहर की सूरत बदली न उसकी तकदीर,
कहां जाऊं, किससे करूं फरियाद ‘सहज’
सारे इल्जामों को झूठ बताता है शहरे वजीर।

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