घाघरा ने तोड़ा दो वर्षों का रिकॉर्ड,खतरा बढ़ा

Barabanki Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
बाराबंकी। घाघरा अब बेलगाम होकर रिहायशी बस्तियों में तबाही मचाने लगी है। दो तहसीलों के साठ गांवों में पानी पहुंच गया है जिससे वहां जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। संपर्क मार्ग व खेत, मैदान पानी में डूबते जा रहे हैं और पीड़ित गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान तलाश रहे हैं। तहसील रामनगर में कस्बा गणेशपुर तक पानी आ गया है। खतरे के निशान 106.07 से 126 सेमी ऊपर पहुंचे नदी के जलस्तर ने बीते दो वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कंट्रोल रूम के मुताबिक जलस्तर 107.250 तक जाने की संभावना है। उधर जिलाधिकारी ने सूरतगंज व रामनगर क्षेत्र के कई गांवाें का जायजा लेने के साथ ही अधिकारियाें को दिशा निर्देश दिए। प्रशासन का दावा है कि जलस्तर बढ़ने के बाद भी सभी बांध सुरक्षित हैं। प्रभावित गांवाें के वासियाें से सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की अपील की गई है। तीन सप्ताह तक उतार-चढ़ाव के बाद घाघरा ने ऐसी पलटी मारी कि तराईवासियाें को संभलने का मौका ही नहीं मिला। तेजी से बढ़ता जलस्तर खतरे का निशान पार करने के साथ ही 107.196 तक पहुंच गया। पानी बढ़ने के साथ ही गांवाें में घुसना शुरू हो गया। जिससे एक के बाद एक दर्जनों गांव पानी से घिर गए। पानी का फैलाव अधिक होने से भले ही इस बार बाढ़ महादेवा मंदिर तक न पहुंची पाई हो पर गणेशपुर कस्बे के किनारे तक पानी पहुंच गया है। प्रभावित गांवाें में झोपड़ी व कच्चे घर पानी की चपेट में हैं। कहीं घर पर तो कहीं मचान पर बैठे पीड़िताें ने गांव नहीं छोड़ा और घाघरा का कोप कम होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि इनके सामने पेट भरने की समस्या भी विकराल है। इन गांवाें तक न तो राहत सामग्री पहुंच सकी और न ही प्रशासन की नावाें का सहारा मिला है। कई गांवाें में पानी अधिक बढ़ने पर पीड़ित सुरक्षित स्थानाें की ओर पलायन कर रहे पर इनकी संख्या काफी कम है। तटबंध पर बसी आबादी के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है। घाघरा की चपेट में गणेशपुर, गोबहरा, मीतपुर, खोजहापुर, पिन्नापुर गांव भी आ गए हैं। रामनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम तपेसिपाह, लहड़रा, सिसौंदा, मड़ना, जानीपुर, लोहटजई, पसई, समस्तीपुर, सिरौली गौसपुर तहसील के नयापुरवा, टेपरा, सिरौली गुंग, मनीरामपुरवा, कुड़वा आदि दर्जनाें गांवों के संपर्क मार्ग भी पानी में डूबे हुए हैं। वर्ष 2010 में 107.156 तथा वर्ष 2011 में 107.116 तक जलस्तर पहुंचा था। इस वर्ष 107.196 तक पहुंचे जलस्तर ने रिकार्ड तोड़ दिए हैं। कंट्रोल रूम के अनुसार फिलहाल ठिठकी नदी का जलस्तर 107.250 तक पहुंचने का अनुमान है। इस स्थिति तक जलस्तर पहुंचने पर तराई का मंजर और खौफनाक होने के आसार हैं।
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