समस्याएं समझ समाधान की कोशिश!

Banda Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
बांदा। बदहाली, तंगहाली, भुखमरी और आत्महत्या जैसे हालात से जूझ रहे गांवों की ओर दिल्ली विश्वविद्यालय की टीम ने रुख किया है। तमाम किसानों ने आत्महत्याएं क्यों की? 20 वर्ष पूर्व उनकी स्थिति कैसी थी? कृषि संकट क्यों है? इन क्षेत्रों में बदहाली से उबरने की क्या संभावनाएं हैं? इत्यादि मुद्दों पर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की 10 सदस्यीय टीम पिछले तीन दिन से मध्य प्रदेश की सरहद से जुड़े गांवों में लोगों से मिलकर जानकारियां जुटा रही है। टीम में शामिल छात्र-छात्राओं का कहना है कि समस्याएं समझकर उनका समाधान निकालने की यह कोशिश है। वे रिपोर्ट तैयार कर विश्वविद्यालय और केंद्र व प्रदेश सरकारों को भेजेंगे।
बुधवार से छात्र-छात्राओं की टीम नरैनी क्षेत्र के गांवों में डेरा डाले है। पिछले दो दिनों में नौगवां, गोपरा, बाबूपुर, नहरी, गुढ़ा, सियारपाखा, माऊ सिंह का पुरवा इत्यादि गांवों का भ्रमण किया है। ग्रामीणों के साथ घुलमिलकर छात्र-छात्राएं उनसे सवालों की झड़ी लगा देते हैं। कर्ज क्यों लिया? कितना लिया? कर्ज का क्या किया? बदहाली की नौबत क्यों आई? आदि सवालों के जवाब अपनी डायरियों में कलमबंद कर रहे छात्र-छात्राएं विभिन्न राज्यों के हैं। ये दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए अंतिम वर्ष के विद्यार्थी हैं।
शोध छात्रा प्रीति कुमारी (बिहार) का कहना है कि इस क्षेत्र के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ रहे हैं। कभी सोना उगलने वाली मिट्टी अब मटियामेट हो रही है। इसमें इच्छा शक्ति की कमी और प्रबंधन का अभाव है। छात्र नील परमार (यूपी) का कहना है कि यहां अभी भी लोग जाति व धर्म में बुरी तरह जकड़ कर बंटे हुए हैं। सरकारी सुविधाओं में भी भेदभाव हो रहा है। नेढ़ुवा गांव में आधी आबादी में बिजली नहीं है। दलित बस्ती अंधेरे में है। छात्र अभिषेक श्रीवास्तव (हरियाणा) ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक बांदा जिले के किसानों पर 700 करोड़ रुपए का कर्ज है। गांव के गांव कर्ज में डूबे हैं। अदायगी के हालात नहीं हो पा रहे। मायूस होकर किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में एक सैकड़ा से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की है। कुपोषण तेजी से बढ़ रहा है।
शोध छात्रा ऋचा (दिल्ली) ने कहा कि कृषि के बढ़ते संकट की मुख्य वजह किसानों की बदहाली है। टीम में शामिल शुभम (बिहार), छात्रा हरमन (पंजाब), छात्र अभिषेक ढलियान (हरियाणा) और अर्पित (जम्मू) ग्रामीणों के साथ मिल-बैठकर उनकी स्थितियों को कलमबंद कर रहे हैं। छात्र-छात्राओं की टीम की अगुवाई दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नरेंद्र पांडेय कर रहे हैं। विद्याधाम समिति के मंत्री राजाभइया टीम की मेजबानी करते हुए उन्हें गांवों का भ्रमण करा रहे हैं। टीम तीन दिवसीय भ्रमण बृहस्पतिवार को पूरा करके वापस दिल्ली जाएगी। टीम का कहना है कि 8-10 दिनों में अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंप देंगे। इसके अलावा रिपोर्ट की प्रतियां केंद्र व प्रदेश सरकारों को भी देंगे। समाजसेवी राजाभइया का कहना है कि शोध में जो तत्व उभरकर आएंगे उन्हें आधार बनाकर क्षेत्रीय विकास के लिए पैरवी की जाएगी। टीम के साथ विद्याधाम समिति के सुरेश, जयनारायण आदि भी शामिल रहे।

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