दम तोड़ रहा मुफ्त इलाज का दावा

Banda Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। जिले में चिकित्सकों की कमी के चलते गांव-गांव मुफ्त सरकारी स्वास्थ्य एवं उपचार सुविधाओं का सरकारी दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। 15 लाख की आबादी के उपचार के लिए 154 सरकारी चिकित्सकों के पद सृजित हैं। इनमें 60 पद वर्षों से खाली हैं। महज 94 डाक्टरों पर पूरे जनपद के बाशिंदों की सेहत सुधारने का जिम्मा है। चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व इतने ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा 45 उप स्वास्थ्य केंद्र महज एक-एक चिकित्सक के भरोसे चल रहे हैं। पीपीसी अतर्रा में सिर्फ एक महिला चिकित्सक ही प्रसव की जिम्मेदार संभाले हुए हैं।
जिले के चार सामुदायिक व चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सिर्फ एक-एक चिकित्सक तैनात हैं। वह भी सरकारी अस्पतालों पर कम, निजी प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान व समय देते हैं।
जिले में स्थित सीएचसी, पीएचसी व उप चिकित्सा केंद्रों के लिए 116 डाक्टरों के पद सृजित हैं। इसके अलावा तीन दंत विशेषज्ञ के पद हैं। इनमें महज 61 चिकित्सकों की मौजूदा समय में तैनाती है। तीन दंत चिकित्सकों के स्थान पर एक से काम चलाया जा रहा है। जिला अस्पताल में 27 चिकित्सकों के पद हैं, जिनमें आठ खाली हैं। 19 डाक्टर ही तैनात हैं। महिला जिला अस्पताल में आठ पद हैं, जिनमें चार खाली हैं। चार महिला चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा है।
अतर्रा स्थित पोस्टपार्टम केंद्र (महिला डिलीवरी केंद्र) में दो महिलाओं के पद सृजित हैं। एक पद सालों से खाली है। यहां प्रतिदिन दर्जन महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं। एक महिला चिकित्सक होने के कारण मजबूरी में लोगों को निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ रही है।
डायरिया, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, मलेरिया, टायफाइड तथा उल्ट-दस्त जैसी बीमारियां जिले में पांव पसार रही हैं। समय पर सही उपचार नहीं मिलने से यही बीमारियां ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। सरकारी अस्पताल के आंकड़ों की मानें तो दो माह में जिले में करीब सैकड़ा भर मरीज दम तोड़ चुके हैं जबकि 450 मरीज कानपुर रिफर किए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के गायब रहने से मरीजों को झोलाछाप या अनुभवहीन डाक्टरों के यहां उपचार कराना पड़ता है।

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