साल भर में 130 दिन बैठे एसडीएम

Banda Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। मुकदमों का निपटारा भी हो तो कैसे? पीठासीन अधिकारियों को न्यायालय में बैठने की मोहलत ही नहीं। 365 दिन के साल में मात्र 130 दिन न्यायालय में न्यायिक कार्य किया गया। यह बानगी है उप जिलाधिकारी न्यायालय की। इसी वजह से 6248 मुकदमों की सुनवाई हो पाई।
आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा के अभियोजन अधिकारी आरके त्रिपाठी ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत अतर्रा उप जिलाधिकारी से पिछले दिनों छह सूचनाएं मांगी थीं। इसमें पूछा गया था कि उप जिलाधिकारी अतर्रा ने कितने दिन न्यायिक कार्य दिवस में न्यायालय में बैठकर राजस्व वादों का निपटारा किया। यह भी जानकारी मांगी गई थी कि कुल कितने वादों का निस्तारण किया गया ? उप जिलाधिकारी न्यायालय से मिली सूचना में बताया गया है कि एक अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2012 तक पीठासीन अधिकारी ने कुल 130 दिन न्यायालय में बैठकर न्यायिक कार्य किया है। इस अवधि में 10 दिन अधिवक्ता संघ शोक प्रस्ताव के कारण और 32 दिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने तथा 46 दिन पीठासीन अधिकारी विधान सभा चुनाव व अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहे तभी इन तिथियों में वादकारियों को अगली तिथि दे दी गई। यह भी जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2011-12 में गुण-दोष के आधार पर कुल 460 वादों का निस्तारण किया गया है। इनमें अदम पैरवी के चलते 161 राजस्व मुकदमे निर्णित किए गए। 6248 मुकदमों में पीठासीन अधिकारी के न बैठने के कारण वादकारियों को अगली तारीखें दी गईं।

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