बहुतों को रोजी की चिंता तो कई हैं खुश

Banda Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। सेहत को भले ही नुकसान पहुंचाता हो लेकिन हजारों लोगों की रोजी और रोटी का जरिया भी है गुटखा। इस पर प्रतिबंध लगने से जिले में दस हजार लोगों से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे लेकिन बहुत से ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस फरमान पर खुशी भी जताई। गुटखा के शौकीनों बहुत हैं और इनमें युवा, बुजुर्ग व महिलाएं सभी हैं। बहुत से बच्चों को भी यह लत है। रोक की सूचना के बाद से कई तो इसका विकल्प भी तलाशने लगे हैं।
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को 14 दिन के अंदर गुटखे पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। एक अनुमान के मुताबिक यहां गुटखा का रोजाना 40 से 50 लाख रुपए का व्यवसाय होता है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की नींद उड़ गई है। बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में उनके पास काम का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उनका कहना है कि जिले में चल रही कताई मिल डेढ़ दशक पूर्व ही बंद हो गई थी। गुटखा फैक्ट्रियों से काम छूटने के बाद अब उनके पास परदेस जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं हैं। दूसरी ओर गुटखा के शौकीनों ने हाईकोर्ट के फरमान के साथ इसके विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में ज्यादातर लोगों ने बताया कि अब तो वे जेब में सरौती व थैली रखेंगे। कई महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें गुटखा की लत सालों से है। प्रतिबंध के बहाने ही उनकी आदत छूटेगी। उल्लेखनीय है कि गुटखा के पहले बुंदेलखंड में पान खाने का खूब चलन था लेकिन सस्ती होने की वजह से गुटखे की लत पान व्यवसाय पर भारी पड़ी। इस समय तुलसी, भारत, 60 नंबर, राजा, श्री चंद्रकमल, राधे-राधे समेत कई गुटखा फैक्ट्रियां शहर में चल रही हैं। हर फैक्ट्री में करीब 100 मजदूर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। बांदा से उत्पादित गुटखा आसपास के कई जिलों में भी बिकता है। इस व्यवसाय से जुड़े तमाम लोग रोजी-रोटी के लिए चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
दूसरी ओर गुटखे पर प्रतिबंध की खबर पर कालूकुआं निवासी विनोद कुमार बताते हैं उन्हें पढ़ाई के वक्त गुटखा की लत लगी। तब से वे इसका सेवन कर रहे हैं। प्रतिबंध की बात पर उन्होंने कहा कि गुटखा खाना सहज व सस्ता था। अब उन्हें जेब में हर वक्त थैली व सरौती रखनी पड़ेगी। कटरा निवासी रवि कुमार कहते हैं कि वाहन चलाते हैं। रास्ते में नींद या झपकी न आए, इसलिए गुटखा खा लेते हैं। प्रतिबंध लग तो दिक्कत होगी। क्योटरा मोहल्ला निवासी नीरज कहते हैं गुटखा सेहत के लिए घातक है, इसलिए प्रतिबंध लगाना उचित है। उन्हें गुटखा की लत है, पर वह इससे जल्द ही तौबा कर लेंगे। छिपटहरी के अशरफ ने बताया कि जी नहीं मानता इसलिए सुपारी मिश्रित गुटखा खा लेते हैं लेकिन इसमें घटिया सुपारी व तंबाकू मिलाई जाती है जो मुंह की बीमारियों को जन्म देती हैं। अब तो वह पान से ही काम चलाएंगे।

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