तीन दशकों से नहीं मिल रहा वेतनमान

Banda Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। शासनादेशों और नियम-कानूनों के बाद भी विद्यालय के प्रधान लिपिक को निर्धारित वेतनमान के लिए पिछले 30 साल से संघर्ष करना पड़ रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक का कई वर्षों पूर्व किया गया आदेश भी बेअसर रहा।
मधुसूदन दास आदर्श इंटर कालेज, जसपुरा में प्रधान लिपिक रामसनेही सिंह चौहान ने डीआईओएस को दी अर्जी में बताया है कि उनके वेतन का निर्धारण 1979 से नहीं किया जा रहा। वेतनमान न लगने से हर माह हजारों रुपए की आर्थिक चपत लग रही है। अवशेष वेतन भी नहीं दिया जा रहा। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। बेटियों की शादी के लिए आर्थिक संकट है। प्रधान लिपिक ने बताया कि 1986 ले 1999 तक लगभग पांच हजार और उसके बाद सितंबर 1999 से दिसंबर 2011 तक लगभग 23 हजार रुपए वेतन में कम मिले। जनवरी 2002 से अब तक 14 हजार रुपए कम दिए जा रहे हैं। बोनस भी नहीं निकाला गया। प्रधान लिपिक का इसी माह रिटायरमेंट है।

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