छोटे व्यापारियों के लिए कफन

Banda Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। एफडीआई को हरी झंडी मिलने के बाद स्थानीय व्यापारियों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया व्यक्त की। ज्यादातर व्यापारियों ने कहा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से छोटे व्यापारी प्रभावित होंगे और बेरोजगारी बढ़ेगी। वहीं कुछ व्यवसायियों ने इसकी वकालत भी की। कहा विदेशी कंपनियों से नुकसान कम लाभ ज्यादा होंगे। कड़ी शर्तें रखकर सरकार विदेशी निवेशकों पर पूरी तरह अंकुश रख सकती है।
सर्राफा व्यवसायी अभिजीत अग्रवाल मानते हैं कि एफडीआई से उनके व्यवसाय में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। एफडीआई को लोग बेवजह हौवा मान रहे हैं। विदेशी पूंजी निवेश से देश व यहां के बाशिंदों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जिले में एफडीआई का हाल में कोई खास दखल नहीं होगा, फिर भी भविष्य में सरकार को इस पर नियंत्रण रखना होगा।
किराना व्यवसायी अरुण कुमार (दाल वाले) ने बताया कि एफडीआई छोटे व्यापारियों के लिए आफत से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से विदेशी कंपनियों का बाजार में दखल बढ़ेगा और कई हाथों से रोजगार छिन जाएगा। आरोप लगाया कि बाजार में कब्जा कर विदेशी कंपनियां मनमाने तरीके से सामान बेचेंगी। कपड़ा व्यवसायी रोहित गुप्ता का कहना है कि सरकार को विदेशी दुकानों को यहां लाने के बजाए यहां के व्यवसायियों को बढ़ावा देना चाहिए। छोटे-मोटे उद्योग धंधे अंतिम सांस ले रहे हैं और सरकार को इनकी फिक्र नहीं है। हार्डवेयर व्यवसायी संजय ओमर व कास्मेटिक कारोबारी मनोज गुप्ता खुदरा व्यवसाय में विदेशी दखल को अशुभ मानते हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों के दबाव में ऐसा फैसला लेना देशवासियों के साथ छलावा है। सरकार को चाहिए कि वे देश के संसाधनों को मजबूत करे और उद्योगों की स्थापना कर बेरोजगारों को ज्यादा से ज्यादा काम दे। एफडीआई व्यवस्था लागू हो जाने पर खुदरा व्यापारी तबाह हो जाएंगे।
ट्रांसपोर्ट व्यवसायी भगवानदीन गर्ग ने कहा कि एफडीआई से आम उपभोक्ताओं को शुद्ध व गुणवत्ता युक्त सामान मिलेगा। एफडीआई के कच्चा माल खरीदने पर किसानों को लाभ मिलेगा। व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा और ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था से आम उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा।

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