शासन ने माफ किया पर वे वसूल रहे शुल्क

Banda Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। शासनादेशों और शासन की मंशा जिला अस्पताल में बेअसर दिखाई देती है। मरीजों और तीमारदारों से बात करो तो ज्यादातर हमेशा अव्यवस्थाओं का रोना रोते दिख जाते हैं। ताजी बानगी में शासन द्वारा मरीजों की भर्ती फीस माफ कर दिए जाने के बाद भी यहां फीस के नाम पर उगाही का सिलसिला जारी है। यह बात कई मरीजों और तीमारदारों ने भी खुद स्वीकारी। दूसरी ओर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई। कहा कि शिकायत मिली तो वे संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
किसी मंत्री या अधिकारी के निरीक्षण में चुस्त-दुरुस्त नजर आने वाला जिला अस्पताल आम दिनों में बदहाल रहता है। पलंगों पर चादर नदारद रहते हैं। अक्सर मरीज अपने घर से चादर मंगाकर बिछाते हैं। खटारा सीलिंग फैन न चलने पर मरीजों को घर का टेबिल फैन लगाना पड़ता है। इन दिनों भी अस्पताल के वार्डों में ऐसा ही नजर आता है। उधर, हाल ही में शासन ने मरीज को भर्ती करने का शुल्क माफ कर दिया है। भर्ती शुल्क 35 रुपए निर्धारित था लेकिन जिला अस्पताल में शासनादेश को ठेंगा दिखाते हुए अस्पताल कर्मी भोले-भाले ग्रामीण मरीजों से फीस के नाम पर रकम ऐंठना जारी रखे हुए हैं।
इन दिनों अस्पताल में भर्ती नंदी (जमवारा) के मुताबिक भर्ती होने के दौरान उसके तीमारदारों को 135 रुपए अदा करना पड़े। गुड़िया (हरदौली) के पति सुरेश से 40 रुपए ले लिए गए। रामजियावन (भरखरी) के पुत्र सुधीर से 35 रुपए लिए गए। मतगंजन (परसौली) को भर्ती कराने आए पड़ोसी को 30 रुपए देने पड़े। पार्वती (परशुराम तालाब) की मां सखिया ने 50 रुपए अदा किए। सोनू सिंह (पारा) के पिता राजेंद्र सिंह को 140 रुपए देना पड़े। उगाही का शिकार हुए मरीजों और उनके तीमारदारों ने यह आपबीती खुद बताई। औसतन रोजाना जिला अस्पताल में आधा सैकड़ा से ज्यादा मरीज भर्ती किए जाते हैं।
उधर, अवैध वसूली के बारे में जिला अस्पताल के सीएमएस डा.शेखर ने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा शुल्क माफ किए जाने के बाद मरीजों को मुफ्त भर्ती किया जा रहा है। अगर किसी मरीज के साथ ठगी हुई है तो शिकायत मिलने पर वह जांच कराकर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

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