पक्की छत के नीचे ही चलेंगे हिंदी माध्यम विद्यालय

Banda Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
बांदा। हिंदी माध्यम के निजी नर्सरी, प्राथमिक व जूनियर विद्यालय अब लिंटर्ड (पक्की) छत के नीचे ही चलेंगे। मान्यता चाहिए तो विद्यालय के लिए कम से कम 25 कक्ष जरूरी होंगे। स्वच्छ शौचालय व फर्नीचर की व्यवस्था करनी होगी। विद्यालयों के संचालक बच्चों से मनमानी फीस भी नहीं वसूल सकेंगे। इन्हीं शर्तों पर नए-पुराने विद्यालयों को मिलेगी मान्यता। हर तीन माह में बीएसए निगरानी करेंगे। खामियां मिलीं तो मान्यता निरस्त होगी।
सूबे में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू हो जाने के बाद शासन ने हिंदी माध्यम के नर्सरी, प्राथमिक व जूनियर स्तर के विद्यालयों में मान्यता की नईं शर्तें लागू की हैं। इन शर्तों के विपरीत यदि कोई विद्यालय संचालित पाया गया तो उस पर सीधे एक लाख रुपए तक का जुर्माना होगा या फिर मान्यता प्रावधानों का उल्लंघन जारी रखने की स्थिति में उसे 5000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाना भरना होगा। सभी विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र मानक के अनुसार स्थापित कराए जाएंगे। आग की स्थिति से निपटने के लिए टीचरों को बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर रहा है जो मान्यता की शर्तें पूरी नहीं करते। शासनादेश के मुताबिक पूर्व से चल रहे ऐसे विद्यालयों को नए सिरे से मान्यता के लिए आवेदन करना होगा। बेसिक शिक्षा महकमे में गठित तीन सदस्यीय टीम जब शर्तों पर पूरी तरह संतुष्ट हो जाएगी, तभी मान्यता मिलेगी। नर्सरी, प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों के भवन निजी व हवादार होंगे। बच्चों के बैठने के लिए यहां कुर्सी व मेज आदि की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही प्राथमिक व जूनियर सभी विद्यालयों को शिक्षण कक्षों के अलावा प्रधानाचार्य कक्ष, स्टाफ कक्ष, शौचालय, स्टोर कक्ष, पेयजल की बेहतर व्यवस्था, खेलकूद का सामान, मानचित्र व शैक्षिक चार्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी। एक ही संस्था व संचालक को नर्सरी, प्राथमिक व जूनियर विद्यालय संचालन के लिए अलग-अलग मान्यता लेनी होगी। इसके अलावा मान्यता मिलने के बाद संचालक मनमानी फीस भी नहीं वसूल सकेंगे।
उन्हें शिक्षण शुल्क, महंगाई शुल्क, विकास शुल्क, बिजली व पानी आदि, पुस्तकालय व वाचनालय, विज्ञान शुल्क, श्रव्य शुल्क, क्रीड़ा, परीक्षा/मूल्यांकन शुल्क तथा विशेष विषयों की शिक्षा कंप्यूटर व संगीत आदि के शुल्क वसूलने की ही छूट होगी। यदि संचालक छात्रों से पंजीकरण व भवन शुल्क या फिर कंपटीशन के रूप में कोई शुल्क वसूला तो मान्यता निरस्त की जा सकती है। मान्यता प्राप्त विद्यालयों में बेसिक शिक्षा परिषद से निर्धारित पाठ्यक्रम या पाठ्य पुस्तकों से हटकर शिक्षा नहीं जाएगी।

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