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खाद न मिलने पर किसानों का गुस्सा फूटा

Banda Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
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बांदा/अतर्रा। अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से किसान डीएपी और यूरिया खाद के लिए परेशान हैं। कहीं खरीद केंद्र देर से खुलते हैं तो कहीं केंद्रों में खाद नदारद है। आक्रोशित किसानों ने खरीद केंद्र में नारेबाजी की। अतर्रा में भी किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया। लगभग एक घंटे बाद जाम खत्म हुआ। उप निदेशक कृषि इसके लिए पीसीएफ और कोआपरेटिव विभाग को जिम्मेदार ठहराते हैं।
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जिला मुख्यालय मंडी परिसर स्थित पीसीएफ बिक्री केंद्र में शनिवार को दोपहर तीन बजे से तालाबंद हो जाने पर खाद के लिए लाइन में लगे तमाम किसान बैरंग वापस लौट गए। रविवार को अवकाश के बाद सोमवार को दोपहर 11 बजे तक केंद्र में ताला लटकने से आक्रोशित किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। महोखर, गुरेह, गंछा, मटौंध, बरगहनी आदि गांवों के किसान कतार में लगे थे। एक घंटे बाद कर्मचारियों के पहुंचने पर वितरण शुरू हुआ।
उधर, अतर्रा स्थित पीसीएफ व एग्रो केंद्र में खाद न मिलने से आक्रोशित किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। वाहनों को आडे़-तिरछा खडे़ कराकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। क्षेत्राधिकारी कृष्णचंद्र सिंह और एसडीएम अशोक कुमार पुष्कर मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने-बुझाने की कोशिश की। किसानों का कहना था कि धान की फसल में छिड़काव के लिए यूरिया खाद की सख्त जरूरत है। खाद न मिली तो उनकी फसल बर्बाद हो जाएगी। सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल के चलते आए दिन बिक्री केंद्रों के चक्कर लगाकर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। एसडीएम ने दो दिन के अंदर पीसीएफ व एग्रो के खरीद केंद्राें से सभी किसानों को खाद उपलब्ध कराने और निर्धारित दर से ज्यादा कीमत वसूलने वाले प्राइवेट दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। एक घंटे तक समझाने-बुझाने के बाद किसान शांत हुए और जाम खत्म किया। उधर, एसडीएम द्वारा खाद की प्राइवेट दुकानों की जांच की भनक मिलते ही दुकानदार शटर बंद कर भाग निकले।
खाद संकट के लिए पीसीएफ जिम्मेदार
बांदा। खाद संकट के लिए उप निदेशक कृषि आरके तिवारी पीसीएफ व कोआपरेटिव अधिकारियों को जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। 6500 मीट्रिक टन डीएपी और 1900 मीट्रिक टन यूरिया का स्टाक पहले से मौजूद था। 1200 मीट्रिक टन यूरिया और आ चुकी है। 525 मीट्रिक टन एनपीएस भी स्टाक में है। खरीफ की फसल के लिए पीसीएफ को 2000 मीट्रिक टन डीएपी और 1600 मीट्रिक टन यूरिया पहले ही आवंटित कर दी गई थी। पीसीएफ व कोआपरेटिव अधिकारियों ने लापरवाही बरतते हुए बिक्री केंद्रों तक खाद नहीं पहुंचाई। खासकर धान की पैदावार वाले अतर्रा क्षेत्र के लिए प्राथमिकता से खाद पहुंचाने को कहा गया था। उक्त दोनों विभागों द्वारा कृत्रिम अभाव पैदा किया गया है।

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