डेढ़ दशक में आधा हो गया धान का रकबा

Banda Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
बांदा। धान की खेती के लिए मशहूर अतर्रा क्षेत्र में धान का रकबा लगातार घटता जा रहा है। डेढ़ दशक में धान का रकबा घटकर 50 फीसदी रह गया। कई साल से सूखे की मार और केन नहर प्रणाली की बदहाली इसके लिए जिम्मेदार है।
जिले में सबसे ज्यादा धान की खेती अतर्रा क्षेत्र में की जाती है। इससे जुडे़ नरैनी क्षेत्र के कुछ हिस्से में भी धान की खेती होती है। डेढ़ दशक पहले यहां 91 हजार 301 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती थी, जो घटते-घटते 55 हजार हेक्टेयर पर आ गई है। इस साल जुलाई में पर्याप्त बारिश न होने से यह रकबा भी कम हो गया है। वर्ष 1998 के बाद धान की खेती में सबसे ज्यादा गिरावट आई। वर्ष 2001 में 68 हजार 512 हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। वर्ष 2002 और 2003 में 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की रोपाई की गई। वर्ष 2004-05 में 61 हजार 888 हेक्टेयर में धान का उत्पादन हुआ।
वर्ष 2005-06 में सूखे की मार ने धान उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी। बमुश्किल 43 हजार 413 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई। 2006-07 में भी किसान पानी की किल्लत से उबर नहीं पाए। बारिश कम होने और नहर पूरी क्षमता से न चलने से 52 हजार 830 हेक्टेयर उत्पादन लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। मात्र 45 हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई। वर्ष 2009-10 धान उत्पादक किसानों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा। मौसम की मार और समय से नहर न चल पाने से 50 फीसदी किसान धान की नर्सरी भी तैयार नहीं कर पाए। चालू वित्तीय वर्ष में कृषि विभाग ने 55 हजार 840 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया। जुलाई में बारिश न होने से लक्ष्य पर शुरुआती ग्रहण लग गया था। धान की बेड़ तैयार न होने से अधिकांश किसान रोपाई नहीं कर पाए। अब तक मात्र 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई हो पाई है।
प्रगतिशील किसान हेमंत तिवारी का कहना है कि धान का रकबा घटने के साथ स्थानीय उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों की खेती अब गिने-चुने किसान ही करते हैं। चिन्नावर, तुलसी भोग, रामभोग, परसन बादशाह, मुस्कन, काला शिवदास आदि प्रजातियों के धान की खुशबू दूर तक फैलती थी। देशी धान फूल बिरंगी, शक्कर, रामकरौनी, बाबा धान, लुढ़कन, बताखी, भैसलोट आदि भी ढूंढे नहीं मिलते। कृषि प्रतिक्षेत्र अधिकारी अतर्रा लेखराज निरंजन का कहना है कि वर्तमान में किसान पंत-12, पंत-10, सोनम, नरेंद्र-359 और 97 प्रजातियाें के बीज ज्यादा खरीद रहे हैं। मौसम की बेरुखी और समय से नहर न चल पाना किसान धान की पैदावर में गिरावट की प्रमुख वजह बताते हैं।


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